बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली और प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा करने वाली खबर सामने आई है। बरियों चौकी क्षेत्र के भेलाई गांव में संचालित एक गिट्टी क्रेशर प्लांट में सुरक्षा मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाने के कारण एक मासूम और युवा मजदूर को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। महज 20 वर्षीय मजदूर अल्मोन रविवार को क्रेशर के कन्वेयर बेल्ट की सफाई कर रहा था, तभी अचानक भारी-भरकम लोहा (मशीन का पुर्जा) गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
उसे इलाज के लिए अम्बिकापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। मृतक सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड के खरकोना का रहने वाला था, जिसके शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की बात कह रही है, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने क्षेत्र में चल रहे मौत के इस काले कारोबार और उस पर मौन बैठे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी क्रेशर प्लांट में किसी गरीब मजदूर की जान गई हो। सवाल यह उठता है कि क्या राजपुर ब्लॉक और पूरे जिले में संचालित दर्जनों गिट्टी क्रेशरों की समय-समय पर प्रशासनिक जांच होती भी है या नहीं? या फिर हर बार की तरह ‘लेन-देन’ के खेल से मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है? यह बेहद शर्मनाक है कि जब भी ऐसी कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तभी शासन-प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है। आखिर हर बार किसी बेकसूर की मौत के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें क्यों खुलती हैं?
चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिस क्रेशर प्लांट में यह हादसा हुआ, वह क्रेशर संघ के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल का बताया जा रहा है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और रसूखदार संचालक ही नियमों को ठेंगा दिखाने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? पैसा कमाने के अंधे लालच में मजदूरों को बिना किसी प्रशिक्षण, बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी बेल्ट और बिना किसी सुरक्षा मापदंड के सीधे मौत के कुएं में धकेल दिया जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि इन गिट्टी क्रेशरों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर लगातार शिकायतें प्रशासन को मिलती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी भी रसूखदार क्रेशर संचालक पर कोई ठोस या कारगर कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की इसी सरपरस्ती और लचर रवैये के कारण इन पूंजीपतियों के हौसले बुलंद हैं। अब इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमाने लगी है। पूर्व अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर क्रेशर संचालक पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
लेकिन बात सिर्फ एक नेता के बयान या पुलिस की खानापूर्ति वाली जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अगर शासन-प्रशासन ने अब भी इस मामले में कोई ठोस और सख्त कदम नहीं उठाया, तो मुनाफे की हवस में ऐसे ही मासूमों की जानें जाती रहेंगी। वक्त आ गया है कि क्षेत्र के सभी क्रशरों की तत्काल और निष्पक्ष जांच की जाए, दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लांटों को हमेशा के लिए सील किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और मां की गोद सूनी न हो।
