अम्बिकापुर/पारसनाथ सिंह। छत्तीसगढ़ का अम्बिकापुर शहर अब धीरे-धीरे अपराध और नशाखोरी के दलदल में धंसता जा रहा है, जिससे यहां के निवासियों में डर का माहौल है। शहर में आए दिन मारपीट, चोरी और छिनतई की घटनाएं आम होती जा रही हैं, और इन सबके पीछे की सबसे बड़ी वजह यहां चरम पर पहुंच चुकी नशाखोरी है। एक तरफ जहां शहर के युवा नशे की गिरफ्त में बर्बाद हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन की लचर व्यवस्था अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है। स्थिति यह आ गई है कि अब आम नागरिकों के साथ-साथ वीआईपी परिवारों के लोग भी बदमाशों के निशाने पर हैं और कानून व्यवस्था पूरी तरह लाचार नजर आ रही है।
वर्तमान में अम्बिकापुर कोतवाली थाना की कमान सब इंस्पेक्टर अखिलेश सिंह के कंधों पर है। हाल ही में उन्होंने कोतवाली की जिम्मेदारी संभाली है, लेकिन उनके पूर्व के सीतापुर थाना प्रभारी के कार्यकाल को देखा जाए तो वह जनता और कानून-व्यवस्था के लिहाज से बहुत अधिक संतोषजनक नहीं रहा था। आखिर उन्हें इतने बड़े शहर की जिम्मेदारी क्यों सौंप दी गई। यह अपने आप में समझ से परे है। सीतापुर में उनके कार्यकाल के दौरान भी पुलिस की कार्यशैली पर तमाम तरह के गंभीर सवाल उठे थे और वह पूरी तरह फिसड्डी साबित हुए थे, उंगलियां उठी थीं। अब जब शहर जैसे संवेदनशील और बड़े थाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है, तो उनकी काबिलियत और कार्यकुशलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। जब थानों में ऐसे अधिकारी तैनात होंगे, तो जाहिर है कि अपराधियों में कानून का खौफ खत्म हो जाएगा और यही कारण है कि अम्बिकापुर आज अपराध के मामले में बदनाम होता जा रहा है। ऐसी विकट परिस्थिति में, वर्तमान में कोतवाली थाना को एक काबिल और तेजतर्रार अफसर की सख्त दरकार है। वैसे भी शहर में विकास के दावों की क्या स्थिति है, यह किसी से छिपी नहीं है, और अब कानून-व्यवस्था का यह हाल शहर की तस्वीर को और भी ज्यादा धुंधला कर रहा है।
कानून-व्यवस्था की इसी नाकामी की बानगी हाल ही में सामने आई दो बड़ी घटनाओं में साफ देखी जा सकती है, जहां बदमाशों ने दुस्साहस की सारी हदें पार कर दीं। पहली घटना में अम्बिकापुर के बौरीपारा तालाब के पास रिंग रोड पर बदमाशों ने एक आईपीएस अधिकारी के बेटे के साथ मामूली विवाद के बाद जमकर मारपीट की और कथित तौर पर धमकी देते हुए कहा कि ‘तेरा बाप पुलिस वाला होगा, हमारा क्या बिगाड़ लेगा।’ आईपीएस रवि कुर्रे के बेटे लेखांश कांत ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि 7 सितंबर की रात वह अपने दोस्तों के साथ रुका था, तभी गोलू गणेश, रतन गुप्ता, कोया डॉन और आशुतोष गुप्ता समेत अन्य लोगों ने उससे विवाद शुरू किया और नाम लेने की बात पर मारपीट की, जिससे उसके कान, कंधे और सिर पर गंभीर चोटें आईं। पुलिस ने इस मामले में बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।
वहीं, दूसरी घटना ने तो पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ाकर रख दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ गृहनिर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव के भतीजे अभिरत सिंहदेव को निशाना बनाया गया। 7 सितंबर की शाम समलाया मंदिर के पास गोलू पठान और राज बंगाला ने अभिरत और उसके दोस्त को रोककर जबरन रुपए की मांग की और मना करने पर जेब से 2500 रुपए लूट लिए तथा मारपीट की। इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। लगातार हो रही इन वारदातों ने यह साबित कर दिया है कि अम्बिकापुर में बदमाशों के भीतर पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है और प्रशासन को अपनी नींद तोड़कर शहर में कानून का राज स्थापित करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
