रायपुर। छत्तीसगढ़ में दिवंगत पंचायत व नगरीय निकाय शिक्षाकर्मियों के आश्रित परिवारों का सब्र अब जवाब दे चुका है। पिछले एक दशक से अनुकंपा नियुक्ति की आस लगाए बैठे इन परिवारों ने सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान कर दिया है। 14 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर के अंबेडकर चौक पर दिवंगत शिक्षाकर्मियों की विधवाएं अपने मासूम बच्चों के साथ सड़कों पर उतरकर भीख मांगते हुए धरना-प्रदर्शन करेंगी। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी शासन ने उनकी पीड़ा नहीं सुनी, तो महिलाएं सामूहिक मुंडन कराकर अपना ऐतिहासिक विरोध दर्ज कराएंगी।
दिवंगत शिक्षाकर्मी पंचायत अनुकंपा संघ की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी सोनवानी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दस साल से वे सिर्फ दफ्तरों और आश्वासनों के चक्कर काट रहे हैं। सरकार चाहे भाजपा की रही हो या कांग्रेस की, दोनों ही कार्यकालों में अधिकारियों ने केवल नियम-कायदों का हवाला देकर फाइलें अटकाए रखीं। अन्य विभागों में अनुकंपा के मामलों का निराकरण तेजी से हो रहा है, लेकिन शिक्षाकर्मियों के अनाथ बच्चों और बेसहारा विधवाओं की गुहार लगातार अनसुनी की जा रही है। ऐसे में सम्मान की लड़ाई के लिए सड़क पर उतरकर चक्काजाम और भीख मांगकर प्रदर्शन करना ही अंतिम विकल्प बचा है।
परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य के असामयिक निधन के बाद ये परिवार भीषण आर्थिक तंगी, बच्चों की अधूरी पढ़ाई और भरण-पोषण के गहरे संकट से जूझ रहे हैं। संघ की मांग है कि मानवीय आधार और पात्रता को ध्यान में रखते हुए शेष बचे सभी आश्रितों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति प्रदान की जाए। यदि सरकार ने इस बार भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो यह आंदोलन राजधानी में एक अभूतपूर्व और तीखे विरोध का रूप लेगा।
