अम्बिकापुर। सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र में उस वक्त बेहद रोमांचक और डरावनी स्थिति पैदा हो गई, जब रानू माड़ा के पास अचानक 13 हाथियों का एक विशाल दल मुख्य सड़क पार करने लगा। कल शाम करीब छह से सात बजे के बीच सायर चौक से ठीक पहले हुई इस अप्रत्याशित घटना से सड़क के दोनों ओर वाहनों के पहिये जहां के तहां थम गए। मोटरसाइकिल, कार और पैदल यात्रा कर रहे दर्जनों राहगीरों की जान उस वक्त हलक में अटक गई जब विशालकाय गजराजों का कारवां उनके ठीक सामने से गुजरा। करीब 20 मिनट तक हवा में घुले इस खौफ और सन्नाटे के बाद, जब हाथियों का दल बिना किसी को नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर बढ़ गया, तब जाकर वहां फंसे लोगों ने राहत की सांस ली।
इस संवेदनशील इलाके में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए रेंजर चौबे के नेतृत्व में वन विभाग की टीम लगातार मुस्तैद है। ग्रामीणों और राहगीरों को जागरूक करने के लिए लगातार मुनादी कराई जा रही है, ताकि लोग हाथियों के करीब जाने का जोखिम न उठाएं। इसके साथ ही हाथियों को रिहायशी बस्तियों में घुसने से रोकने के लिए वन अमले की एक विशेष टीम ‘गजराज वाहन’ के जरिए चौबीसों घंटे इलाके की सतत निगरानी कर रही है। हालांकि, वन्यजीवों के अप्रत्याशित व्यवहार को देखते हुए विभाग ने आम जनता से बेहद सजग और सतर्क रहने की अपील की है।
यह घटना केवल एक अस्थायी डर नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। वर्तमान में जो कुछ जंगल बचे हैं, हाथी वहीं तक सीमित हैं; लेकिन भविष्य के हालात बेहद चिंताजनक नजर आ रहे हैं। इस क्षेत्र में केते एक्सटेंशन, पीईकेबी (PEKB) और तारा कोल ब्लॉक जैसे बड़े खनन प्रोजेक्ट्स के लिए जिस तेजी से जंगलों की कटाई की योजना है, उससे हाथियों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह तबाह हो जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि जैसे ही ये जंगल साफ होंगे, बेघर हुए हाथियों के ये दल सीधे इंसानी बस्तियों का रुख करेंगे। आने वाले कुछ ही सालों में यह स्थिति इस पूरे अंचल में मानव-हाथी द्वंद्व (Human-Elephant Conflict) का एक नया और बेहद भयानक स्वरूप अख्तियार कर सकती है।
