दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं की संवेदनहीनता और लापरवाही के चलते एक 20 वर्षीय युवती की जान चली गई, जिसके बाद प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। भिलाई के मरोदा की रहने वाली सिकलिन (सिकल सेल एनीमिया) पीड़ित दीपिका गाड़ा की ब्लड न मिलने से हुई मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार संविदा कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। 28 जून 2026 को की गई इस कार्रवाई ने पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी को जांच सौंपी थी। लगभग 27 दिनों तक चली इस विस्तृत जांच में जो सच सामने आया, वह बेहद चौंकाने वाला था; जब अस्पताल के ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त सुरक्षित रखा हुआ था, तब भी जिंदगी और मौत से जूझ रही दीपिका को खून नहीं दिया गया। परिजनों को अस्पताल स्टाफ द्वारा डोनर तलाशने के लिए भटकने पर मजबूर किया गया और डोनर न मिलने की स्थिति में मरीज को खून उपलब्ध ही नहीं कराया गया, जिससे मात्र 5.5 ग्राम हीमोग्लोबिन पर जूझ रही दीपिका ने दम तोड़ दिया। जांच में न केवल ब्लड बैंक स्टाफ बल्कि ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों की भी घोर लापरवाही उजागर हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम में गाज गिरी है रेडक्रॉस सोसायटी और एनएचएम (NHM) के तहत तैनात कर्मचारियों पर। रेडक्रॉस सोसायटी से ब्लड बैंक में नियुक्त दो लैब टेक्निशियन तरन्नुम जहां और नशरा परवीन, सहित एनएचएम से नियुक्त दो स्टाफ नर्स जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर की संविदा सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। कार्रवाई यहीं नहीं रुकी है; स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉ. निखिल अग्रवाल और एनएचएम विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संयुक्त संचालक को पत्र भेजा जा चुका है।
हालांकि, इस प्रशासनिक हंटर के बाद स्वास्थ्य महकमे में अंदरूनी राजनीति और असंतोष भी उबलने लगा है। एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जे. पी. मेश्राम और आरएमओ डॉ. अखिलेश यादव जैसे बड़े अधिकारियों के बार-बार बयान बदलने के बावजूद उन्हें साफ बचा लिया गया है, जबकि केवल छोटे और संविदा कर्मचारियों को ही बलि का बकरा बनाया गया है।
दीपिका की इस दुखद मौत और कलेक्टर की सख्त जांच रिपोर्ट के बाद छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने गहरी नींद से जागते हुए प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के लिए बेहद कड़े और नए नियम जारी कर दिए हैं। भविष्य में ऐसी किसी भी अमानवीय घटना को रोकने के लिए सरकार ने साफ कर दिया है कि अब से किसी भी सिकल सेल, थैलेसीमिया और इमरजेंसी के मरीजों से खून के बदले खून (रिप्लेसमेंट डोनर) की मांग बिल्कुल नहीं की जा सकेगी।
इसके साथ ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दुर्ग सहित प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों को रोजाना सुबह अपने उपलब्ध ब्लड स्टॉक की सटीक जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपडेट करनी होगी। नए नियमों के तहत यदि ब्लड बैंक का स्टाफ किसी मरीज को सहयोग देने में आनाकानी करता है, तो ऑन-ड्यूटी डॉक्टर की यह सीधी जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत सिविल सर्जन को इसकी लिखित या मौखिक सूचना दें।
