सामान्य सभा में धरने पर बैठा विपक्ष, बजट से पहले किया वाकआउट

महापौर ने 5.67 लाख के बचत का किया बजट पेश

 

अम्बिकापुर

 

नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक में बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लेट से बजट पेश करने को लेकर विपक्ष ने न सिर्फ जमकर हंगामा किया, बल्कि सभापति के सामने जमीन पर बैठ गये। अधिनियम का हवाला देते हुये विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष जन्मेजय मिश्रा ने जहां महापौर को अधिनियम पढ़ कर सुनाने कहा तो दोनों ही पक्षों में जमकर तीखी नोक-झोक हुई और विपक्ष ने नारेबाजी षुरू कर दीं। हंगामा इतना बढ गया कि प्रष्नकाल के पहले ही सभापति ने 10 मिनट के लिये सभा को स्थगित कर दिया।

 

प्रश्नकाल खत्म होते ही महापौर डॉ अजय तिर्की द्वारा वर्ष 2017-18 का बजट पेश किया जा रहा था कि एक बार पुनरू विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष का कहना था कि महापौर की लापरवाही के कारण बजट देर से प्रस्तुत हो रहा है, जिसे वे प्रस्तुुत नहीं होने देंगे। काफी हंगामा के बाद विपक्ष सभापति के सामने जमीन पर बैठ गये और नारेबाजी शुरू कर दी। सभापति शफी अहमद ने भी सख्त लहजो में नेता प्रतिपक्ष को हिदायत देेते हुये कहा कि वे अपने आप को निलम्बित समझ लें और सदन से चले जायें। इसके बाद विपक्ष के पार्षद और भी बौखला गये और वे सदन से नहीं जाने की बात कहते हुये महापौर के विरूद्ध नारेबाजी करने लगे। विपक्ष ने कहा कि बजट सात दिन बाद पेश किया जाये वे सीमित समय में कैसे पूरे बजट का अवलोकन कर पायेंगे। विपक्ष को अड़ा देख सभापति ने काफी कड़े तेवर अपनाते हुये कहा कि ये अधिनियम की अवहेलना है। विपक्ष ने सभापति से कहा कि वे उन्हें निलंबन कर दें फिर भी वे बाहर नहीं जायेंगे। सभापति ने पुनरू कड़े तेवर दिखाते हुये विपक्ष को बाहर जाने कहा। जिसके बाद विपक्ष ने नियम विरूद्ध तरीके से महापौर द्वारा बजट पेश करने की बात कहते हुये विरोध स्वरूप सदन से वकआउट कर दिया। काफी हंगामा के बाद महापौर ने 5.65 लाख के लाभ का बजट पेश किया।

 

जिसमें वित्तीय वर्ष 2017-18 का प्रस्तावित आय राशि रूपये 34450.45 लाख के विरूद्ध राशि रूपये 34445.78 लाख का व्यय अनुमान किया गया है। महापौर ने कहा कि निकाय का वार्षिक वित्तीय बजट वित्तीय वर्ष के दौरान विभिनन स्त्रोतो से संभावित एवं आवश्यकता के अनुरूप शहर के विकास एवं कल्याणकारी योजनाओ का समावेश करते हुये और सभी वर्गों का ध्यान रखते हुये यह बजट तैयार की गई है। बजट पूरी तरह से केंद्र सरकार और राज्य सरकार के  द्वारा संचालित योजनाओं एवं अनुदान के आधार पर एवं निकाय के स्वयं के स्त्रोतो से प्राप्त आय के आधार पर तैयार किया जाता है। नगर निगम अम्बिकापुर के इतिहास मेें यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर पर इतनी ख्याति मिली हो।  पूरे निगम परिवार एवं शहर अम्बिकापुर के लिये यह गौरव की बात है कि एसएलआरएम के माध्यम से स्वच्छता के संबंध में निगम अम्बिकापुर के द्वारा जिस मॉडल पर कार्य किया गया, छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त नगरीय निकायों में इसी मॉडल के अनुरूप कार्य किये जा रहे हैं। मिशन क्लिन सिटी के नाम पर नवीन राज्य परिवर्तित योजना प्रारंभ की गई है। जिसके अंतर्गत प्रदेश के समस्त 168 नगरीय निकायों में इसी मॉडल के आधार पर स्वच्छता एवं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का कार्य कराया जा रहा है, जो अम्बिकापुर नगर निगम के लिये गौरव की बात है। इस परियोजना को केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं विभिन्न स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा सराहा गया है। इस प्रोजेक्ट की सराहना पीएमओ कार्यालय द्वारा भी की गई है एवं केंद्रीय नगरीय विकास मंत्री द्वारा भी व्यक्तिगत रूप से सराहना की गई है।

दोहरा खेल क्यों खेल रहे हैं नेता प्रतिपक्ष-महापौर

सदन में गहमा-गहमी के बीच एकाएक महापौर उठे और कहा कि नेता प्रतिपक्ष दोहरा खेल क्यों खेल रहे हैं।  जब पिछले सामान्य सभा की बैठक में आयुक्त को कार्यवाही व लापरवाही के लिये लताड़ा गया था तब उनके समर्थन में नेता प्रतिपक्ष खड़े हो गये थे। महापौर ने नेता प्रतिपक्ष से कहा कि अगर वे सही में जनहित चाहते हैं तो आयुक्त का समर्थन न करें। महापौर श्री तिर्की ने कहा कि बजट आयुक्त की लापरवाही के कारण लेट से पेश हुआ। नियत तिथि तक आयुक्त ने एमआईसी में बजट नहीं रखा था व बीच में त्यौहार व विपक्ष के पार्षदों के बाहर जाने की सूचना के कारण बजट को देर से पेश करना पड़ा।

अस्थायी दखल शुल्क में हेरा-फेरी

प्रश्रकाल के दौरान पार्षद आलोक दुबे ने अस्थायी दखल शुल्क को लेकर सवाल उठाया और उन्होंने कहा कि वे निगम से जिस रसीद क्रमांक की जानकारी मांगे थे। उसमें उन्हें दो प्रकार की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि जो जानकारी उन्हें निगम से मिली है उनमें एक ठेले वाले को 40 रूपये का रसीद काटा गया है और निगम के रजिस्टर में पांच रूपये दर्ज किया गया है। श्री दुबे ने कहा कि इसी प्रकार कई रसीद प्रमाण के तौर पर उन्होंने दिखाया और कहा कि आखिर 35 रूपये किसके खाते में जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निगम में अस्थायी दखल शुल्क की वसूली में एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है। निगम को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाई जा रही है। श्री दुबे ने राजस्व विभाग के कर्मचारी-अधिकारी व प्रभारी के ऊपर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। सभापति ने जांच उपरांत कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।

और बन गई शराब दुकान-

सदन में पार्षद आलोक दुबे ने सवाल उठाया कि नगर में जिन तीन शराब दुकानों को निगम ने बनवाया है। उन दुकानों का अब तक आबंटन ही नहीं हुआ है। श्री दुबे ने कहा कि इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के लिये अब तक जमीन का आबंटन नहीं हुआ है। नगर में आंगनबाड़ी व शौचालय के लिये भी जमीन का आबंटन नहीं होना बताया।

गर्मी के मद्देनजर स्कूल बंद करने की मांग

निर्दलीय पार्षद हरमिंदर सिंह टिन्नी ने सदन में आवाज उठाते हुये कहा कि बढ़ती गर्मी के मद्देनजर कम से कम बच्चों का स्कूल बंद करवाने के लिये पहल करनी चाहिये। इस पर सभापति सहित सत्तापक्ष के पार्षदों ने भी सहमति जताते हुये कहा कि इसके लिये सभी प्रशासन से मिलकर शासन तक अपनी मांग रखेंगे।