एसडीएम बंगला के बगल में दूसरी टँकी में भी लिकेज

जल आवर्धन योजना के तहत बनी है टंकियाँ

लिकेज छिपाने लाखों लीटर पानी बहा चुका पीएचई विभाग

सूरजपुर

प्रतापपुर से राजेश गर्ग 

जल आवर्धन योजना के तहत एसडीएम बंगला के बगल में बनी पानी टँकी में भी पानी भरते है लिकेज चालु हो गया है,नये बस स्टैंड में बनी टँकी मरण पहले से ही लिकेज है। बार बार मरम्मत के बावजूद लिकेज बन्द नहीं होने के कारण पीएचई विभाग लिकेज छिपाने कई लाख लीटर पानी बहा चुका है,बावजूद इसके प्रशासन इतने बड़े भ्रष्टाचार को दबाने पीएचई विभाग सूरजपुर के भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को बचाने में लगा है।
गौरतलब है कि करीब तीन करोड़ की लागत से नगर पंचायत प्रतापपुर में जल आवर्धन योजना का काम पीएचई विभाग द्वारा ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है जो भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ चुका है। इसके तहत दो पानी की टंकियाँ बनाई गयी हैं। इनमें से नए बस स्टैंड में निर्मित टँकी में पहले पानी भरा गया था जिसके बाद पानी भरते ही लिकेज चालु हो गया था,विभाग द्वारा इसका दो तीन बार मरम्मत कराया जा चुका है लेकिन लिकेज बन्द नई हो रहा है। दूसरी टँकी एसडीएम बंगला के बगल में बनाई गयी है जिसमें अब तक पानी नहीं भरा गया था लेकिन इसमें भी पानी भरते ही लिकेज चालु हो गया,इसकी स्थिति तो ऐसी हो गयी है कि कई जगहों से पानी लिकेज होने के बाद बह रहा है।इस टंकी को भी इनके द्वारा खाली करा मरम्मत कराया जा चुका है किन्तु पानी बहना बन्द नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि पूरी जल आवर्धन योजना भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ चुकी है पूर्व में पाईप लाईन विस्तार कार्य में ही जमकर भ्रष्टाचार दिख रहा था किन्तु जैसे ही टँकीयों में पानी भरा गया इनका घटिया निर्माण भी सामने आ गया। इन दोनों टँकीयों से ही पुरे नगर में पानी सप्लाई होनी है किन्तु घटिया निर्माण और भ्र्ष्टाचार के भेंट चढ़ चुके इन टँकीयों से पानी लिकेज के कारण इनके भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। टँकीयों के घटिया निर्माण और पानी लिकेज के बाद भी शासन प्रशासन पुरे मामले में चुप्पी साधे हुए है तथा भ्र्ष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों का ही सहयोग कर रही है।

लिकेज छिपाने बहा दिया लाखों लीटर पानी

टँकीयों के घटिया निर्माण पर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध कार्यवाही व् भुगतान की गयी राशि की वसूली कर टँकीयों के नवनिर्माण की बजाये पीएचई विभाग बार बार इनका मरम्मत करवाने में लगा है जिसका कोई फायदा नई हो रहा। सबसे बड़ी बात तो यह है कि विभाग इन टँकीयों में बार बार पानी भरवा रहा है और लिकेज दीखते ही टँकीयों में भरे पानी को बहवा दे रहा है,एक टँकी करीब दो लाख लीटर पानी क्षमता की है और अब तक दस लाख लीटर से ज्यादा पानी अपने भ्र्ष्टाचार को छिपाने अधिकारी बहा चुके हैं। अधिकारी लोगों की आँखों में धुल झोंकने का प्रयास कर रहे हैं वे इस सोच के साथ बार बार पानी बहा रहे हैं कि टँकी में पानी नहीं रहेगा तो लिकेज भी नई दिखेगा।

डिप्टी कलेक्टर ने लिकेज को कहा सामान्य प्रक्रिया

टँकीयों के लिकेज मामले में सूरजपुर जिले के एक डिप्टी कलेक्टर ने तो सारी हदें पार करते हुए लिकेज को सामान्य प्रक्रिया बता दिया। प्रतापपुर के आरटीआई कार्यकर्ता राकेश मित्तल ने टँकी में लिकेज की शिकायत सीएम जनदर्शन में की थी जिसके बाद अपना प्रतिवेदन देते हुए उक्त डिप्टी कलेक्टर ने बताया है कि लिकेज टँकी के दोनों लेयर के जोड़ों से हो रहा है जो एक सामान्य प्रक्रिया है और आने वाले समय में लिकेज खुद ही बन्द हो जाएगा । आरटीआई कार्यकर्ता ने उक्त डिप्टी कलेक्टर की शिकायत पीएमओ में करते हुए उन पर भ्र्ष्ट पीएचई के अधिकारियों से मिली भगत का आरोप लगाया है। शिकायत में उन्होंने यह भी बताया कि डिप्टी कलेक्टर ने तकनीकी मार्गदर्शन में बिना जांच किये ही पीएचई के ईई के प्रभाव में आकर अपना प्रतिवेदन दे दिया है। जबकि लिकेज मामले में कई स्वतन्त्र इंजीनियरों का कहना है कि अब टँकीयों का मरम्मत सम्भव नहीं है और इनका नवनिर्माण ही स्थायी समाधान है।