शहर मेें हैंडपंपों के पानी में हार्डनेस की समस्या बढ़ी

गदंगी से पानी हो रहा प्रदुषित, बचाव के उपाय नहीं

अम्बिकापुर

क्षेत्र के हैंडपंप के पानी को प्रदुषण से बचाने के लिए कोई उपाय नहीं किये जा रहे है। कई जगहों पर हैंडपंप नाली से लगे हुए जिससे गंदा पानी अंदर जाकर पानी को प्रदूषित कर रहा है। इससे पानी में हार्डनेस की समस्या बढ़ रही है। कई क्षेत्रों के हैंड़पंप के पानी में हार्डनेस पाई गई है। जांच कराई जाए तो कई अन्य क्षेत्रों में भी यह समस्या सामने आ सकती है। जिले में कई क्षेत्रों में हैंडपंपों के पानी में फ्लोराइड की भी समस्या है।

करीब डेढ़ लाख की आबादी वाले इस शहर में 724 हैंडपंप लग चुके है। पेयजल के लिए यह सुविधा डे़ढ़ करोड़ लीटर पानी सप्लाई की व्यवस्था के अतिरिक्त है। जिनके घरों में नल कनेक्शन नहीं लगे है, ऐसे लोग अब भी हैंडपंप पर निर्भर है। मांग पर हैंडपंप लगाए भी जा रहे है। विडंबना यह है कि जिस तेजी से हैंडपंप लग रहे है, उस हिसाब से देख रेख की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। ज्यादात हैंडपंप सुरक्षित जगह पर नहीं है। कहीं नाली के किनारे तो कहीं ऐसे जगहों पर है, जहां निस्तारी का पानी हैंडपंपों के नीचे जाकर पानी को दूषित कर रहा है। इससे पानी से हार्डनेस की समस्या बढ़ती है। इस संकेत के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी क्षेत्र से शिकायत आने पर जांच कराई जाती है। नगर के कुछ क्षेत्रों में शिकायत पर हैंडपंप के पानी की जांच कराई गई थी । जांच में गोधनपुर , चोपड़ापारा सहित कई इलाकों के पानी मे हार्डनेस पाई गई थी । नियमित जांच होनी चाहिए तभी वास्तविक स्थिति का पता चलता रहेगा ।

ग्रामीण क्षेत्र में फ्लोराइड़
शहर के हैंडपंपों में एक ओर जहां हार्डनेस की शिकायत आ रही है वहीं दूसरी ओर कई ग्रामीण क्षेत्रों के हैंडपंपों में फ्लोराइड़ है। पिछले सालों में एकीकृत सरगुजा में इस समस्या के कारण 90 हैंडपंप बंद कराये जा चुके है। फ्लोराइड एक प्रकार का कैल्शियम है जो मानव शरीर की हडिडयों को मजबूती प्रदान है। पानी में यह अनिवार्य है लेकिन इसकी मात्रा 1 पीपीएम होना चाहिए ।ज्यादा मात्रा पाए जाने पर पानी काफी खतरनाक हो जाता है ।यदि कोई गर्भवती महिला फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा वाला पानी सेवन कर रही है तो उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे केे विकलांग होने का खतरा बढ़ जाता है ।बच्चे मंदबृद्धि व व शारीरिक रूप से विकलांग जन्म लेते है। जिले के जिन क्षेत्रों के पानी में फ्लाराइड़ है वहां के पानी में 4 पीपीएम तक फ्लोराइड़ है जो काफी खतरनाक है।

डीप बोर वाले पानी में ज्यादा समस्या
पानी में हार्डनेस की समस्या डीप बोर वाले हैंडपंपों में ज्यादा रहती है। पिछले साल अच्छी बारिश से जल स्तर थोडा सुधरा है लेकिन यह संतोषजनक नहीं है। शहर के ही नमनाकला , गोधनपुर , गांधीनगर जैसे कई क्षेत्रों मेें हैंडपंप के लिए निर्धारित मापदंड से अधिक खनन करना पड़ता है। गर्मी मेे जल स्तर घटने के बाद ऐसे हैंडपंप से मटमैला पानी निकल रहा है।

24 हजार हैंडपंप
एकीकृत सरगुजा में 24 हजार से अधिक हैंडपंप हो गए है। इनमें सरगुजा व बलरामपुर में साढे आठ – आठ हजार जबकि सूरजपुर में सात हजार है। तीनों जिलों में 1757 गांव है। इस दृष्टि से देखा जाए तो एक गांव में औसतन 15 हैंडपंप हो गए है। विडंबना यह है कि लगातार चेतावनी के बाद भी हैंडपंप लगाने बंद नहीं हो रहे है। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय मानक के अनुसार हैंडपंप काफी अधिक हो गए है। हैंडपंप को लेकर जो मापदंड तय किया गया है उसके अनुसार ढाई सौ की आबादी के बीच एक हैंडपंप होना चाहिए ।छत्तीसगढ़ में यह मापदंड़ लगभग दो सौ की आबादी है और सरगुजा में करीब सौ का हो गया है।

क्या लक्षण है ?
पानी मेें हार्डनेस बढ़ने के बाद झाग निकलना बंद हो जाता है। धुलाई से कपडे का रंग तेजी से निकलने लगता है। अगर इस पानी का पीने में उपयोग किया जाता है तो उससे भी अभास होने लगता है। पानी में हार्डनेंस बढ़ने के बाद एसिडिटी की शिकायत शुरू हो जाती है। लंबे समय से इस पानी के सेवन से कई प्रकार की बीमारियां होने की संभावना रहती है । नियमित रूप से क्लोरिन की दवा डालने तथा गंदा पानी को हैंडपंपों में घुसने से रोका जाए तो पानी ठीक रह सकता है। अभी तो जांच नहीं होने के कारण पता नहीं है किस हैंडपंप का ठीक और किस हैंडपंप का पानी खराब है।