जांजगीर-नैला। वार्ड क्रमांक 01 निवासी सुनील कश्यप ने नगर में चल रहे सम्पवेल एवं पाइपलाइन विस्तार कार्य को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कश्यप ने पत्र के माध्यम से जनहित के इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि करीब 1 करोड़ 97 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत पेयजल योजना में खुलेआम भ्रष्टाचार, लापरवाही और तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार यह कार्य ज्योति इलेक्ट्रिकल, मेन रोड कटघोरा को आवंटित किया गया था, जिसे आगे पेटी कांट्रेक्ट के जरिए अमन अग्रवाल और दीपानी कंस्ट्रक्शन को सौंप दिया गया। आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा मानक के अनुरूप पाइपों का उपयोग नहीं किया जा रहा, बल्कि लोकल और घटिया गुणवत्ता के पाइप बिछाए जा रहे हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि पाइपलाइन के नीचे आवश्यक बेस तक नहीं डाला जा रहा, जो भविष्य में बड़े हादसे और भारी नुकसान को न्योता दे सकता है।
सुनील कश्यप का कहना है कि शासन ने यह राशि वार्डों में घर-घर सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वीकृत की थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। संपवेल और पानी टंकी का निर्माण तो दिखावे के लिए हो रहा है, मगर गुणवत्ता से खुला समझौता किया जा रहा है।
शिकायत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-
घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग ठेकेदार और संबंधित विभागीय इंजीनियरों की मिलीभगत से निर्माण कार्य में अत्यंत घटिया स्तर के सीमेंट, रेत और छड़ (लोहे) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी टंकी की मजबूती और उम्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह सीधे तौर पर आम जनता के जीवन से खिलवाड़ है।
लागत और कार्य में विसंगति 2 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट कागजों पर जिस भव्यता और मापदंड के साथ स्वीकृत हुआ था, जमीनी स्तर पर उसके विपरीत बेहद कम लागत का काम स्पष्ट दिखाई दे रहा है। सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और बंदरबांट किया गया है।
तकनीकी मापदंडों (Estimates) की अनदेखी स्वीकृत डीपीआर (DPR) और एस्टीमेट के अनुसार सम्पवेल की गहराई और पानी टंकी की क्षमता का निर्धारण नहीं किया गया है। कार्य में पारदर्शिता का पूर्ण अभाव है और निर्माण स्थल पर कोई भी सूचना पटल (Information Board) नहीं लगाया गया है।
पेयजल संकट की स्थिति इस भ्रष्टाचार के कारण निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है, और जहाँ पूरा हुआ है वहाँ से भी पानी की सप्लाई सुचारू रूप से नहीं हो रही है।
जगह-जगह से लिकेज परिणाम स्वरूप, भीषण गर्मी के इस मौसम में वार्डवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
अतः श्रीमान जी से करबद्ध प्रार्थना है कि उक्त निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय तकनीकी टीम से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
निर्माण कार्य का मूल्यांकन (Valuation) कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए।
भ्रष्टाचार में लिप्त संबंधित ठेकेदार और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों, इंजीनियरों पर एफ आई आर (FIR) दर्ज कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए, ताकि शासकीय धन का सही उपयोग हो सके और जनता को शुद्ध पेयजल मिल सके।
