रायपुर। बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसम तंत्र के प्रभाव से छत्तीसगढ़ भर में मानसून बेहद सक्रिय हो गया है। रायपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा संभाग सहित राज्य के मैदानी, दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर ने प्रदेश के 28 से अधिक जिलों में गरज-चमक, 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और वज्रपात (आकाशीय बिजली) के साथ भारी बारिश का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया है। आने वाले कुछ घंटों में प्रदेश के कई इलाकों में मध्यम से भारी बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है।
जानकारी के अनुसार, राजधानी रायपुर, बलौदाबाजार और आसपास के मैदानी इलाकों में तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान है, जबकि दुर्ग, राजनांदगांव और बेमेतरा में दिनभर काले बादल छाए रहने के साथ तेज बौछारें गिर सकती हैं। वहीं बस्तर और सरगुजा संभाग के अंदरूनी और पहाड़ी क्षेत्रों में आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम सबसे अधिक जताया गया है। मौसम विभाग ने सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, गरियाबंद, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, मुंगेली, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर समेत प्रभावित जिलों के निवासियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
मौसम के इस कड़े रुख को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है। बिजली चमकने और आंधी-तूफान के दौरान लोगों को खुले मैदानों, जल निकायों और ऊंचे पेड़ों के नीचे न रुकने की हिदायत दी गई है। विशेष रूप से ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में अलर्ट जारी करते हुए किसानों से अपील की गई है कि खेत में काम करते समय यदि बादल गरजें या बारिश शुरू हो, तो वे बिना देरी किए किसी पक्के और सुरक्षित स्थान पर शरण लें।
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