जांजगीर-चांपा। जिले में एल्डरमैन नियुक्ति की सूची जारी होते ही भारतीय जनता पार्टी में सियासी भूचाल आ गया है। सूची सामने आते ही पार्टी के जमीनी, ईमानदार और वर्षों से निष्ठा के साथ संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिली। आरोप है कि संगठन को मजबूत करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर ऐसे चेहरों को एल्डरमैन बनाया गया है, जो हाल ही में पार्षद पद का चुनाव हार चुके थे।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर हार का सामना कर चुके कार्यकर्ताओं को पिछले दरवाजे से सत्ता में प्रवेश क्यों दिया गया, जबकि जिन्होंने चुनाव में दिन-रात पसीना बहाया, उन्हें एक बार फिर हाशिये पर धकेल दिया गया। यही नहीं, संघ की ओर से भेजे गए नामों पर भी सहमति नहीं बन पाई, जिससे यह साफ हो गया कि संघ और पार्टी के बीच तालमेल पूरी तरह चरमरा चुका है।
पार्टी के अंदर यह चर्चा आम है कि नियुक्तियों में सिर्फ एक ही नेता के समर्थकों को तरजीह दी गई, जिससे बाकी गुटों के कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो दिव्यांग कोटा से एक भी नाम को मौका न मिलना भी सवालों के घेरे में है। इससे पार्टी के “सबका साथ, सबका विकास” के दावे खोखले नजर आ रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि नए और युवा कार्यकर्ताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया, जबकि यही वर्ग भविष्य की राजनीति की नींव माना जाता है। शहर में बीजेपी की गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है और यह असंतोष अगर समय रहते नहीं संभाला गया, तो इसका सीधा नुकसान आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। जैसे विधानसभा में चुकाना पड़ा।
