जांजगीर चांपा। पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों राजनीति का सबसे कड़वा सच सड़क पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ डोंगाकोहरौद गांव के ग्रामीण जर्जर सड़क को लेकर अनिश्चितकालीन धरना, प्रदर्शन और चक्काजाम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पामगढ़ विधानसभा पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े बीजेपी कार्यालय में जन्मदिन का जश्न मनाते नजर आए। यह दृश्य जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया जा रहा है।
डोंगाकोहरौद की सड़क वर्षों से बदहाली का प्रतीक बनी हुई है। बड़े-बड़े गड्ढे, टूट चुकी परत और हर मौसम में जानलेवा हालात यही ग्रामीणों की मजबूरी है। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, मरीजों को अस्पताल ले जाना जोखिम भरा हो चुका है और रोज़मर्रा की आवाजाही किसी परीक्षा से कम नहीं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस सड़क को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले।
ग्रामीणों का गुस्सा इसलिए भी फूट पड़ा है क्योंकि पामगढ़ विधानसभा में पहली बार बीजेपी को जिताने वाली यही जनता आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है। लोगों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद पूर्व विधायक क्षेत्र के मुद्दों से दूर होते चले गए। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आज उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
धरना स्थल पर महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी मौजूद हैं। ग्रामीणों ने साफ ऐलान कर दिया है कि जब तक जर्जर सड़क का निर्माण नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
जन्मदिन के केक और जश्न की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है। पामगढ़ विधानसभा में यह सवाल अब गूंज रहा है क्या सत्ता की खुशियां जनता की पीड़ा से ऊपर हैं? जनता पूर्व विधायक पर निष्क्रियता का आरोप लगा रहे हैं। उनके द्वारा जनहित मुद्दों में किए जा रहे इस आंदोलन से वे दूरी बनाए हुए हैं। आने वाला समय जरूर इसका हिसाब जनता देगी।
इधर पामगढ़ के पूर्व विधायक एवं भाजपा जिलाध्यक्ष अम्बेश जांगड़े ने अपने जन्मदिवस को सेवा, समर्पण और संगठनात्मक उत्साह का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह दिन आत्मचिंतन के साथ जनसेवा के संकल्प को और मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन की मजबूती, अनुशासन और जनहित के मुद्दों पर निरंतर सक्रिय रहने का आह्वान किया।
