जांजगीर चांपा। जिले में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत ने जनजीवन को पूरी तरह से पंगु बना दिया है। बीते तीन दिनों से शहर के लगभग सभी पेट्रोल पंप ड्राई पड़े हैं, जिससे आम जनता, किसान, व्यापारी, नौकरीपेशा और आपातकालीन सेवाएं तक बेहाल हो चुकी हैं। सड़कों पर वाहन खड़े हैं, खेतों में काम ठप है और बाजारों की रफ्तार थम सी गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि हॉस्पिटल और एंबुलेंस चालक ईंधन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं—यह स्थिति सीधे तौर पर मानव जीवन के लिए खतरा बन चुकी है।
किसानों के सामने डीजल के अभाव में सिंचाई और परिवहन ठप पड़ गया है। व्यापारियों की सप्लाई चेन टूट रही है, माल अटका हुआ है और रोज़गार पर सीधा असर पड़ रहा है। नौकरीपेशा लोग समय पर दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे, सार्वजनिक परिवहन सीमित हो गया है और निजी वाहन बेकार खड़े हैं। शहर में अफरा-तफरी का माहौल है, लेकिन जिला प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि संकट के इतने दिनों बाद भी न तो वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा हुई और न ही ईंधन आपूर्ति बहाली की कोई ठोस समय-सीमा बताई गई। पेट्रोल पंपों पर जानकारी के अभाव में जनता भ्रमित है, अफवाहें फैल रही हैं और कालाबाजारी का खतरा बढ़ रहा है।
अब वक्त आ गया है कि जिला प्रशासन तत्काल संज्ञान लेकर आपात बैठक बुलाए, तेल कंपनियों से समन्वय कर इमरजेंसी कोटा जारी करे, एंबुलेंस, अस्पताल, पुलिस, फायर और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दे। साथ ही, जनता को स्पष्ट सूचना और समयबद्ध समाधान बताया जाए। ईंधन संकट पर ढिलाई नहीं, तत्काल कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता है।
