बलरामपुर..(कृष्णमोहन कुमार)..जिले के त्रिपुरी में अफीम की खेती मिलने से हड़कंप मच गया है. पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंची हुई है. मुआयना किया जा रहा है कि आखिर अफीम की खेती इस सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचल में किसने की है. हालांकि पुलिस ने 2 खेत मालिकों को हिरासत में लिया है और पूछताछ में जुटी हुई है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अफीम की खेती खेत को लीज में लेकर की गई थी. पुलिस के लिए चुनौती है कि आखिर खेती करने वाले लोग कहां से है और कहां-कहां पर अफीम की खेती की है.
दरअसल, ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया है. लगभग 2 एकड़ खेत में अफीम की खेती की गई थी, लेकिन अहम सवाल यह है कि आखिर अफीम के पौधे एक दो दिन में तो इतने बड़े नहीं हुए होंगे. जो ग्रामीणों को नजर आए हो. त्रिपुरी में लगभग 3 महीने पहले अफीम की खेती की नींव रखी गई होगी, लेकिन पुलिस का सूचना तंत्र फेल था और उसे इस खेती की भनक तक नही लगी. वैसे त्रिपुरी गांव जिले के अंतिम छोर पर बसा हुआ है. इसके एक ओर झारखंड के लातेहार जिले का सीमा है. तो वहीं दूसरी ओर जशपुर जिले का सीमावर्ती इलाका है.
कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी में अफीम ने हड़कंप मचा कर रख दिया है. दुर्ग के समोदा गाँव के बाद सीधे बलरामपुर जिले में अफीम देखने को मिला है. अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कार्यवाही का हवाला देते हुए चुप्पी साध ली है. पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है. पुलिस ने 2 खेत मालिकों को हिरासत में लिया है.
बहरहाल, प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से अफीम की खेती ही बड़ा मुद्दा बनकर उभरा हुआ है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप का दौरा जारी है. सोशल मीडिया पर कई तरह के पोस्ट और मीम वायरल हुए है और इसी बीच बलरामपुर जिले में अफीम की खेती ने प्रदेश की राजनीति में सुलग रही आरोप-प्रत्यारोप की आग को और हवा दे दी है. हालांकि त्रिपुरी के खेत मालिक ग्रामीण परिवेश के है और उन्होंने खेत लीज पर दिया हुआ था. ऐसे में अब देखने वाली बात है कि पुलिस अफीम की खेती करने वालो को कब तक गिरफ्तार कर पाती है.
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