रांची। 249 रन का विशाल स्कोर खड़ा करने के बावजूद वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में मिली करारी हार ने भारतीय खेमे को गहरा मंथन करने पर मजबूर कर दिया है। मैच के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने बल्ले और गेंद के बीच निष्पक्ष संतुलन की पुरजोर वकालत तो की, लेकिन साथ ही गेंदबाजों को यह दो टूक संदेश भी दे दिया कि मुश्किल हालात में भी जीत का रास्ता खुद ही तलाशना होगा। शाई होप की कप्तानी पारी और शेरफेन रदरफोर्ड के तूफानी 84 रनों के दम पर कैरेबियाई टीम ने टी20 इतिहास का अपना दूसरा सबसे बड़ा रन चेज पूरा कर भारत को बैकफुट पर धकेल दिया।
मैच के बाद गंभीर ने सपाट पिचों और भारी ओस के बीच गेंदबाजों का बचाव करते हुए कहा कि क्रिकेट सिर्फ चौकों-छक्कों की नुमाइश नहीं हो सकता। गेंदबाजों का करियर भी दांव पर होता है और खेल की खूबसूरती के लिए बल्ले व गेंद के बीच बराबरी का मुकाबला बेहद जरूरी है। इसके बावजूद, कोच ने हार का ठीकरा परिस्थितियों पर फोड़ने से साफ मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व चैंपियन टीम होने के नाते बहाने बनाने के बजाय खामियों को स्वीकारना होगा। जब विपक्षी टीम पहले ही ओवर में दो और पावरप्ले में तीन विकेट गंवा चुकी हो, तब मैच पर पकड़ ढीली होना गंभीर चिंता का विषय है।
मैच का टर्निंग पॉइंट 10वें ओवर में मयंक यादव द्वारा 38 रन पर छूटा रदरफोर्ड का कैच रहा, जिसके बाद विंडीज बल्लेबाज ने मैच का रुख ही पलट दिया। इस साल भारतीय टीम की कैचिंग सफलता दर गिरकर 74.3 प्रतिशत रह गई है, जो शीर्ष टीमों में दूसरी सबसे खराब है। इसके बावजूद गंभीर ने किसी एक खिलाड़ी को दोषी ठहराने से इनकार करते हुए इसे खेल का हिस्सा बताया।
गंभीर ने मयंक यादव की 149.5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार और उनकी विकेट चटकाने की क्षमता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि एक विशुद्ध तेज गेंदबाज को अपनी गति से समझौता किए बिना अपनी मूल ताकत पर ही भरोसा रखना चाहिए। अब सीरीज 1-1 की बराबरी की दहलीज पर खड़ी है और भारतीय टीम के पास संभलने का वक्त बेहद कम है। रविवार को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में होने वाले तीसरे मुकाबले में छोटी बाउंड्री और पाटा विकेट पर भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की असली परीक्षा होगी।
