कानपुर। चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए देहदान महादान की श्रेणी में आता है, लेकिन 20 साल पुराने संकल्प को मृत्यु के बाद परिवार द्वारा निभाना समाज के सामने एक अनुकरणीय मिसाल पेश करता है। उन्नाव के एबी नगर निवासी 82 वर्षीय पूर्व आयकर अधिकारी और वरिष्ठ गायत्री साधक सिद्धनाथ श्रीवास्तव की पार्थिव देह शुक्रवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को ससम्मान समर्पित कर दी गई। वर्ष 2006 में उन्होंने जो संकल्प लिया था, दो दशक बाद उनके नाती ऋषि श्रीवास्तव और पूरे परिवार ने एकजुट होकर उसे साकार कर दिखाया। ‘युग दधीचि देहदान महायज्ञ’ अभियान के अंतर्गत यह 327वां देहदान दर्ज किया गया।
दिवंगत सिद्धनाथ श्रीवास्तव का गुरुवार शाम कानपुर के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था। शोक की घड़ी में भी परिवार अपने बुजुर्ग के जीवन संकल्प से डिगा नहीं। नाती ऋषि श्रीवास्तव ने तत्काल अभियान प्रमुख मनोज सेंगर से संपर्क साधा और देहदान की औपचारिकताएं पूरी करने का अनुरोध किया। आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूर्ण होते ही शुक्रवार सुबह मेडिकल कॉलेज के विशेष वाहन से पार्थिव देह को एनाटॉमी विभाग ले जाया गया। वहां परिवार की बहू-बेटियों ने आरती उतारी और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उन्हें विदा किया।
जीवनपर्यंत गायत्री परिवार से जुड़े रहे सिद्धनाथ श्रीवास्तव ने कई विराट अश्वमेध यज्ञों और उन्नाव गायत्री शक्तिपीठ में सक्रिय सेवाएं दी थीं। अभियान की महासचिव माधवी सेंगर के अनुसार, यह देहदान भावी चिकित्सकों की व्यावहारिक शिक्षा और शोध में मील का पत्थर साबित होगा। इस भावुक किंतु प्रेरणादायी क्षण में बेटी शशिबाला, दामाद आनंद, पुत्र शिव सागर, नाती ऋषि व यश, भाई जगदीश व लक्ष्मीकांत समेत गायत्री परिवार के कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।
