नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने रक्षा इतिहास के सबसे बड़े सौदे की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। भारत ने फ्रांस को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये का औपचारिक ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ (LoR) जारी कर दिया है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को महाशक्तिशाली बूस्ट देने वाले इस मेगा डिफेंस सौदे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कुल 114 विमानों में से 94 का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इस ऐतिहासिक समझौते की कड़ियों को मजबूत करने के लिए भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह खुद इस समय फ्रांस के दौरे पर हैं, जहां वे इस बहुप्रतीक्षित रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने के लिए दसॉल्ट एविएशन और मिसाइल निर्माता कंपनी MBDA के प्रतिष्ठानों का गहन निरीक्षण कर रहे हैं।
वायुसेना प्रमुख का यह दौरा केवल विमानों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच भविष्य के सामरिक और तकनीकी सहयोग की नई इबारत लिख रहा है। इस प्रस्तावित सौदे के तहत भारत ने फ्रांस के सामने बेहद सख्त और दूरगामी शर्तें रखी हैं, जिनमें अत्याधुनिक स्वदेशी हथियारों का राफेल में एकीकरण, भारतीय डेटा-लिंक प्रणाली का समावेश, पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और बड़े पैमाने पर भारत के भीतर ही एयरोस्पेस इकोसिस्टम का विकास शामिल है। यह सौदा भारतीय रक्षा बाजार में इंजन निर्माण, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स के क्षेत्र में एक नए औद्योगिक युग की शुरुआत करेगा।
रणनीतिक रूप से तैयार किए जा रहे इस बेड़े में 88 सिंगल-सीटर (एक पायलट वाले) लड़ाकू विमान और 26 ट्विन-सीटर (दो पायलट वाले) ट्रेनर विमान शामिल होंगे। शुरुआती कुछ विमान सीधे फ्रांस से उड़ान भरकर भारत आएंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारतीय जमीन पर 55 से 60 प्रतिशत तक स्थानीयकरण (लोकल कंपोनेंट्स) के लक्ष्य के साथ किया जाएगा। इन नए राफेल विमानों को आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए उन्नत एईएसए (AESA) रडार, अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और लंबी दूरी तक अचूक निशाना लगाने वाली मिसाइल क्षमताओं से लैस किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में इस ‘मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट’ (MRFA) परियोजना को आवश्यक स्वीकृति (AoN) प्रदान की गई थी। इसके बाद से ही इस प्रक्रिया में तेजी आई है, जो न केवल भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नए शिखर पर ले जाएगी, बल्कि स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (AMCA) कार्यक्रम के लिए इंजन तकनीक हासिल करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
