नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के समृद्ध परिवारों से विदेशी धरती पर ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ करने के मोह को त्यागकर भारत के भीतर ही विवाह समारोह आयोजित करने का एक बड़ा आह्वान किया है। गुजरात के वडोदरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल आर्थिक चिंताओं को रेखांकित किया, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव का भाव भी जगाया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और मध्य-पूर्व के मौजूदा हालातों के बीच पीएम मोदी का यह सुझाव सीधे तौर पर देश की विदेशी मुद्रा को सुरक्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि आजकल एक फैशन के तौर पर शादी-ब्याह के लिए विदेशी गंतव्यों का चयन किया जा रहा है, जिससे देश की पूंजी का एक बड़ा हिस्सा बाहर चला जाता है।
प्रधानमंत्री ने मध्यम और उच्च वर्ग की मानसिकता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अक्सर छुट्टियां शुरू होते ही बच्चों के हाथों में विदेशी दौरों के टिकट थमा दिए जाते हैं, जबकि भारत में ही ऐसे अनगिनत स्थल मौजूद हैं जो इतिहास, सौंदर्य और गौरव की मिसाल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम अपने बच्चों को अपने देश की मिट्टी और यहां के महान इतिहास से परिचित कराने के बजाय केवल विदेशी चकाचौंध तक सीमित रखना चाहते हैं? पीएम मोदी के अनुसार, भारत में आयोजित होने वाली शादियों का एक अलग भावनात्मक और आध्यात्मिक महत्व होता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जब कोई परिवार अपनी जड़ों से जुड़कर स्वदेशी मिट्टी पर विवाह संस्कार संपन्न करता है, तो उसे अपने पूर्वजों का अदृश्य आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो किसी भी विदेशी रिसॉर्ट में संभव नहीं है।
पर्यटन और विकास को एक साथ जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का उदाहरण दिया और इसे एक विश्वस्तरीय वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल की यह गगनचुंबी प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एकता का प्रतीक है और वहां विवाह करना अपने आप में एक ऐतिहासिक अनुभव होगा। उन्होंने भविष्य के जोड़ों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि वे सरदार साहब के सानिध्य में अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करते हैं, तो उन्हें स्वयं महापुरुष का आशीर्वाद प्राप्त होगा। इस प्रकार, प्रधानमंत्री ने शादियों को केवल एक निजी आयोजन से ऊपर उठाकर इसे राष्ट्र निर्माण और ‘वोकल फॉर लोकल’ के अभियान से जोड़ने का एक नया विजन देश के सामने रखा है।
