नई दिल्ली। राजधानी की सड़कों पर मंगलवार को विपक्षी एकजुटता का आक्रामक रूप देखने को मिला, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों का ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ संसद से शुरू होकर एक बड़े सियासी गतिरोध में बदल गया। नई संसद भवन क्षेत्र से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ रहे विपक्षी नेताओं को जब भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगाकर रोका गया, तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हाथ में तिरंगा थामे खुद बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गए। संसद से निर्वाचन सदन जाने से रोके जाने पर राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और शीर्ष विपक्षी नेताओं ने आयोग मुख्यालय से महज 270 मीटर दूर स्थित आकाशवाणी भवन परिसर में डेरा डाल दिया और करीब दो घंटे तक धरने पर डटे रहे।
सियासी गर्माहट के बीच संसद से अशोक रोड तक का पूरा इलाका छावनी में तब्दील नजर आया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर पूरे क्षेत्र में ड्रोन से निगरानी बढ़ा दी गई। दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और अर्धसैनिक बलों ने मोर्चा संभाल रखा था, लेकिन इसी बीच कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी आकाशवाणी भवन के आसपास जुटने लगे। कार्यकर्ताओं के गेट और बसों पर चढ़ने के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई शुरू की। इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी व डेरेक ओ’ब्रायन सहित कई सांसदों को हिरासत में लेकर बसों से हटाया गया, जबकि प्रियंका गांधी को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया।
धरने के बीच राहुल गांधी ने वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव आयोग से कथित “वोट चोरी” पर जवाब मांगने निकला था, लेकिन चुनिंदा जनप्रतिनिधियों को जनता की आवाज उठाने से रोका जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र पर चुनावी शुचिता प्रभावित करने का आरोप मढ़ा, वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि निष्पक्षता का दावा करने वाले आयोग को विपक्ष का सामना करना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल सपा सांसद जया बच्चन ने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) मतदाताओं के अधिकारों पर पोस्टर लहराते हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर चिंता जताई। विपक्षी खेमे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर तत्काल रोक, पूर्ण पारदर्शिता और मतपत्र व्यवस्था की वापसी सहित पांच सूत्रीय मांगें सामने रखी हैं और इस पूरे प्रकरण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय भी मांगा है।
