रायपुर। आसमान से बरसती आग और ऊपर से सरकार की नीतियों से भड़कती महंगाई; इस दोहरी मार ने छत्तीसगढ़ के गरीब और मध्यम वर्ग को जीने लायक नहीं छोड़ा है। इस भीषण गर्मी के बीच पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की ‘टेंशन’ को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। प्रदेश की जनता अभी पिछले झटकों से संभल भी नहीं पाई थी कि तेल कंपनियों ने पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाकर आम आदमी की बची-कुची रीढ़ भी तोड़ दी है। सोमवार सुबह 6 बजे से लागू हुईं नई दरों के बाद राज्य में हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
इस ताजा और निर्मम बढ़ोतरी में पेट्रोल के दामों में 2.48 रुपये से लेकर 4.13 रुपये प्रति लीटर तक का भारी उछाल आया है। वहीं, मालभाड़े और कृषि से सीधे जुड़े डीजल को भी नहीं बख्शा गया, जिसके दाम 2.60 रुपये से लेकर 4.28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए गए हैं। तेल कंपनियों की इस मनमानी का सीधा और सबसे क्रूर असर रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर, सरगुजा और रायगढ़ समेत प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों के उन उपभोक्ताओं पर पड़ा है, जो पहले से ही महीने का राशन जुटाने में संघर्ष कर रहे हैं। इस बेतहाशा वृद्धि ने न सिर्फ वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, बल्कि हर उस घर का बजट बिगाड़ दिया है जहां रोज कमाना और रोज खाना है।
अगर आंकड़ों के आईने में इस बेबसी को देखें, तो राजधानी रायपुर में अब पेट्रोल की कीमत 108.06 रुपये प्रति लीटर के डरावने स्तर पर पहुंच गई है, जहां एक ही झटके में 2.70 रुपये की बढ़ोतरी की गई। डीजल भी पीछे नहीं है, वह भी 2.85 रुपये महंगा होकर 101.32 रुपये प्रति लीटर पर तांडव कर रहा है। न्यायधानी बिलासपुर का हाल तो और भी बुरा है; यहाँ पेट्रोल अब 108.71 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है, जिसमें 2.77 रुपये की वृद्धि की गई है। वहीं आम जनता की जेब पर डाका डालते हुए डीजल को 2.92 रुपये महंगा कर 101.97 रुपये प्रति लीटर पर पहुंचा दिया गया है।
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही इस आग का सीधा असर सिर्फ गाड़ियों की टंकी तक सीमित नहीं रहने वाला है। पेट्रोल-डीजल के महंगे होते ही रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की ढुलाई लागत (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) का बढ़ना तय है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में सब्जी, दूध, राशन से लेकर हर छोटी-बड़ी चीज गरीब की पहुंच से और दूर हो जाएगी। भीषण गर्मी के इस मौसम में जब जनता को राहत की उम्मीद थी, तब सरकार और तेल कंपनियों के इस गठजोड़ ने महंगाई का ऐसा चाबुक चलाया है जिसने मध्यम वर्ग को पूरी तरह से लाचार कर दिया है।
