नई दिल्ली। मई महीने की पहली तारीख आम आदमी की रसोई के लिए दोहरी मार लेकर आई है। सुबह कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में आए भारी उछाल के बाद अब ‘छोटू’ यानी 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर ने भी मध्यम और निम्न वर्ग के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। सूत्रों के अनुसार, 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में ₹261 प्रति सिलेंडर की बेतहाशा बढ़ोतरी की गई है, जो सीधे तौर पर उन लोगों की जेब पर प्रहार है जो दैनिक कमाई पर निर्भर हैं।
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद, जो छोटा सिलेंडर कल तक ₹549 में उपलब्ध था, उसके लिए अब उपभोक्ताओं को ₹810 चुकाने होंगे। एकमुश्त ₹261 का यह इजाफा छोटे उपभोक्ताओं के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, खासकर तब जब सुबह ही 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दामों में ₹993 की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। इस बदलाव के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,078.50 से बढ़कर अब ₹3,071.50 के स्तर पर पहुंच गई है।
कीमतों में हुए इस विस्फोट का सबसे गहरा असर समाज के उस तबके पर पड़ेगा जिनके पास कोई स्थाई ठिकाना नहीं है। 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से वे प्रवासी मजदूर करते हैं जो अपना घर-बार छोड़कर दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी की तलाश में आए हैं। इसके साथ ही, घर से दूर रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों के मासिक बजट में भी अब बड़ा अंतर देखने को मिलेगा। रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे ढाबा संचालक और डेली वेज वर्कर्स, जिनके लिए चूल्हा जलाना पहले ही एक चुनौती थी, अब इस महंगाई के बोझ तले दबते नजर आ रहे हैं।
रसोई गैस की कीमतों में लगी इस आग के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को मुख्य कारण माना जा रहा है। 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी आपूर्ति का संकट गहरा गया है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है। दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे औद्योगिक शहरों से प्रवासी मजदूरों का पलायन पहले ही चिंता का विषय बना हुआ था, और अब ईंधन की इन बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की स्थिति को और अधिक दयनीय बना दिया है।
