वाराणसी. उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी कानूनी खबर वाराणसी से सामने आई है, जहाँ 24 साल पहले पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हुए जानलेवा हमले के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. बुधवार को वाराणसी की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए विधायक अभय सिंह और एमएलसी श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह सहित सभी छह आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया.
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अत्याधुनिक हथियारों से हमला करने के आरोपों को साबित करने में विफल रहा, जिसके चलते संजय सिंह रघुवंशी, सतेंद्र उर्फ बबलू सिंह, संदीप सिंह उर्फ पप्पू और विनोद सिंह को भी बाइज्जत बरी कर दिया गया.
यह पूरा मामला 4 अक्टूबर 2002 का है, जब तत्कालीन रारी विधायक धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ वाराणसी के एक अस्पताल से मरीज देखकर वापस जौनपुर लौट रहे थे. शाम करीब छह बजे नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास उनके काफिले पर घात लगाकर बैठे हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी. इस भीषण हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर वासुदेव पांडेय और ड्राइवर दिनेश कुमार गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे. स्थिति तब और बिगड़ गई थी जब धनंजय के गनर ने भी आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस के पहुँचने पर हमलावर मौके से फरार हो गए.
घटना के बाद धनंजय सिंह ने अभय सिंह और उनके साथियों के खिलाफ कैंट थाने में नामजद मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने लंबी जांच के बाद 14 दिसंबर 2002 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें वर्तमान विधायक और एमएलसी को मुख्य आरोपी बनाया गया था. दो दशकों से अधिक समय तक चली इस कानूनी लड़ाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने के बाद, अंततः अदालत ने पर्याप्त गवाहों और सबूतों की कमी को आधार मानते हुए सभी आरोपियों को इस मामले से मुक्त करने का आदेश दिया.
