वर्ल्ड वेटरनरी एसोसिएशन के आह्वान पर प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह के चौथे शनिवार को यह दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष यह 25 अप्रैल, शनिवार को मनाया जा रहा है।
इस वर्ष का विषय है — “पशु चिकित्सक = भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक”
यह थीम हमें यह बताती है कि पशु चिकित्सक केवल पशुओं के डॉक्टर ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के भी रक्षक हैं।
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ कृषि के साथ-साथ पशुपालन का कार्य भी समान रूप से किया है।पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रमुख साधन है और देश की अर्थव्यवस्था तथा GDP में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
ऐसी स्थिति में पशुओं का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है।
जब पशु स्वस्थ रहेंगे, तभी दूध, अंडा और मांस का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनेगा।
और इस पूरे दायित्व को निभाने का कार्य करता है — एक पशु चिकित्सक।
#पशु चिकित्सक न केवल बीमार पशुओं का उपचार करते हैं, बल्कि वे विभिन्न रोगों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण भी करते हैं।
इससे पशु बीमार नहीं पड़ते और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जाता है।
#साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि पशुओं से प्राप्त होने वाले उत्पाद — जैसे दूध, अंडा और मांस — सुरक्षित और रोगमुक्त हों, ताकि मानव स्वास्थ्य पर कोई खतरा न आए।
#आज के समय में फूड सिक्योरिटी (खाद्य सुरक्षा) एक बड़ी चुनौती है।
बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ पौष्टिक भोजन की मांग भी बढ़ रही है।
यह गर्व की बात है कि आज भारत दूध उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है और अंडा उत्पादन में भी तेजी से वृद्धि हो रही है।
इस उपलब्धि के पीछे पशु चिकित्सकों का महत्वपूर्ण योगदान है, जो लगातार पशुओं की देखभाल, नस्ल सुधार और उत्पादन बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं।
#इसके अलावा, पशु चिकित्सकों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जूनोटिक बीमारियों को रोकना भी है —
यानी वे बीमारियाँ जो पशुओं से मनुष्यों में फैलती हैं
जैसे —
* कुत्तों से फैलने वाला रेबीज
* गायों से फैलने वाला ब्रुसेलोसिस
* मुर्गियों से फैलने वाला बर्ड फ्लू
इन बीमारियों से बचाव के लिए पशु चिकित्सक समय-समय पर टीकाकरण करते हैं और समाज में जागरूकता भी फैलाते हैं
#पशु चिकित्सकों का वन्य जीव के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण योगदान है जिसका यह परिणाम है कि देश में वन प्राणियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है
#अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि पशु चिकित्सक केवल पशुओं का इलाज ही नहीं करते, बल्कि वे
✔ नस्ल सुधार
✔ रोगों की रोकथाम
✔ उत्पादन वृद्धि
✔ और खाद्य सुरक्षा
जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी अपना योगदान देते हैं।
वे वास्तव में “भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक” हैं, जो न केवल पशुओं बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
(डॉ सी के मिश्रा) अतिरिक्त उपसंचालक पशुपालन विभाग अंबिकापुर सरगुजा
