रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर नगर निगम की सोमवार को बुलाई गई विशेष सामान्य सभा की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। शहर में मानसून की पहली ही भारी बारिश के बाद उपजे भीषण जलभराव और चरमराई ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर सदन में तीखी बहस हो रही थी। लेकिन इसी दौरान एक बेहद हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला। करीब 3000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाले इस नगर निगम के खुद के मुख्यालय (व्हाइट हाउस) के सभाकक्ष की छत से पानी टपकने लगा। हालात इस कदर बिगड़े कि सदन की कार्यवाही के बीच ही अधिकारियों को आनन-फानन में पानी रोकने के लिए टेबल के नीचे गमले और डस्टबिन रखने पड़े। इस वाकये ने निगम के रखरखाव और दावों की पोल खोलकर रख दी।
सदन के भीतर और बाहर, दोनों ही तरफ निगम प्रशासन के खिलाफ आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। विपक्ष के नेता आकाश तिवारी अखबारों की कतरनों से बनी एक अनोखी लाइफ जैकेट पहनकर सदन पहुंचे। उन्होंने शहर की बदहाली पर तंज कसते हुए प्रदेश की ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार को पूरी तरह फेल बताया। वहीं, तीखी बहस के बीच भाजपा पार्षद स्वप्निल मिश्रा ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बेहद कड़े शब्द इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘चोर’ तक कह डाला। उन्होंने आरोप लगाया कि जोन अधिकारी न तो जमीन पर काम कर रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधियों का सहयोग कर रहे हैं। इस पर सभापति ने उन्हें तुरंत टोकते हुए मर्यादा में रहने और शब्दों का सही चयन करने की हिदायत दी। सदन के बाहर भी माहौल गर्म था; भुगतान नहीं मिलने से नाराज ठेकेदारों ने निगम कमिश्नर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया।
बैठक में पार्षदों ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि शहर के कई बड़े नहर-नालों पर कंक्रीट स्लैब डालकर अवैध निर्माण कर लिए गए हैं, जिससे उनकी चौड़ाई बेहद कम हो गई है। मॉनसून से पहले नालों की ठीक से गाद (डी-सिल्टिंग) नहीं निकाली गई, जिसके चलते पहली ही बारिश का पानी लोगों के घरों और सड़कों पर भर गया। इस अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए महापौर ने माना कि जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं के कारण लगातार दबाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने शहर के तेजी से हो रहे कंक्रीटीकरण को जलभराव की मुख्य वजह बताया और कहा कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को नक्शे पास करते समय नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। साथ ही, दूसरे विभागों द्वारा बनाई गई सड़कों के कारण भी कई जगह पानी रुक रहा है।
मुख्यालय की टपकती छत के सवाल पर महापौर ने पत्रकारों से कहा कि अचानक हुई तेज बारिश के कारण यह दिक्कत आई है, जिसे जल्द ही दुरुस्त कर लिया जाएगा। फिलहाल, शहर की सफाई और जलभराव की स्थिति को सुधारने के लिए नगर निगम आयुक्त को एक हफ्ते का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है। अधिकारियों को एक ठोस वर्किंग प्लान बनाने और महापौर व नेता प्रतिपक्ष के साथ मिलकर समन्वय बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि इस साल नालों की सफाई और विकास के लिए निगम ने साल 2026-27 के बजट में करीब 3 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले साल के 2 हजार करोड़ के बजट से काफी अधिक है। अब देखना यह है कि इस भारी-भरकम बजट के बाद रायपुर की जनता को जलभराव से कब तक राहत मिलती है।
