कोरबा। एसईसीएल (SECL) की गेवरा परियोजना में होने वाली भारी ब्लास्टिंग अब नराईबोध गांव के लिए सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दहशत का दूसरा नाम बन चुकी है। दोपहर ढलते ही जब खदान में बारूद सुलगता है, तो पूरा गांव भूकंप के झटकों की तरह कांप उठता है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि आसमान से बरसते पत्थरों और मकानों की दरकती दीवारों के बीच ग्रामीण हर पल मलबे में तब्दील होने के साये में जी रहे हैं। हाल ही में एक घर की एस्बेस्टस शीट को चीरकर कमरे के भीतर गिरे भारी पत्थर ने इस खौफ को हकीकत में बदल दिया। गनीमत रही कि उस वक्त कमरे में मौजूद जिंदगियां बाल-बाल बच गईं, लेकिन अगले ही दिन उसी जगह दोबारा गिरे पत्थर ने प्रबंधन के दावों की पोल खोलकर रख दी। मानसून की दस्तक के साथ ही अब इन जर्जर हो चुके आशियानों के ढहने का खतरा और ज्यादा गहरा गया है।
यह संकट सिर्फ छतों से टपकते खौफ तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन के भीतर भी इसके गहरे जख्म दिखने लगे हैं। लगातार होने वाले तीव्र कंपनों के कारण गांव के कुएं और बोरवेल दम तोड़ रहे हैं, जिससे नराईबोध में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, घटना के बाद रस्म अदायगी के लिए पहुंचे एसईसीएल के अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त शीट को बदलने और मुआवजे का झुनझुना जरूर थमाया है, लेकिन ग्रामीणों का साफ कहना है कि उन्हें चंद रुपयों का मुआवजा नहीं, बल्कि जिंदगी की सुरक्षा और ब्लास्टिंग की सुरक्षित तकनीक चाहिए।
खदान से उठते इस बारूदी धुएं के बीच रोजगार और पुनर्वास की अनदेखी ने ग्रामीणों के आक्रोश में घी डालने का काम किया है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि नियमानुसार हकदार होने के बावजूद पात्र युवाओं को रोजगार की कतार में सबसे पीछे धकेल दिया गया है, जबकि अपात्रों पर मेहरबानियां बरसाई जा रही हैं। विस्थापन और बसाहट के नाम पर समतलीकरण के बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर कछुआ गति से चल रहा काम ग्रामीणों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। कई दौर की त्रिपक्षीय बैठकें और प्रशासनिक टेबल पर हुए समझौते अब तक सिर्फ कोरे आश्वासन ही साबित हुए हैं।
आखिरकार, वादों की इस टालमटोल से तंग आकर नराईबोध के ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का तुरंत स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो पूरा गांव एकजुट होकर एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का चक्काजाम और घेराव करेगा, जिससे पैदा होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ प्रबंधन की होगी।
