– न मीडिया को सूचना, न युवाओं को आमंत्रण, विभाग ने ऑडिटोरियम में चुपचाप निपटा दिया कार्यक्रम; आयोजन की पारदर्शिता पर उठे सवाल
जांजगीर-चांपा। युवाओं की प्रतिभा को मंच देने और उनकी रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के नाम पर आयोजित जिला स्तरीय युवा महोत्सव कहीं सरकारी फरमान पूरा करने की औपचारिकता बनकर तो नहीं रह गया? खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने 31 अक्टूबर को जिला स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन तो कर लिया, लेकिन आयोजन की जानकारी न तो मीडिया तक पहुंची और न ही शहर के अधिकांश युवाओं को इसकी भनक लग सकी। चर्चा है कि विभाग ने ऑडिटोरियम में सीमित दायरे में कार्यक्रम आयोजित कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
विडंबना देखिए, जिस महोत्सव का उद्देश्य जिले के युवाओं को उनकी प्रतिभा दिखाने का अवसर देना था, उसी आयोजन की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने में विभाग कितना सक्रिय रहा, यह बड़ा सवाल है। लोकनृत्य, लोकगीत, चित्रकला, कविता लेखन, नुक्कड़ नाटक और क्रिएटिव यूथ रील जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित करने का दावा किया गया, लेकिन इन प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया?
आयोजन में सांसद कमलेश जांगड़े सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए। पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र भी वितरित किए गए। सरकारी समाचार में कार्यक्रम की भव्यता और युवाओं के उत्साह का उल्लेख जरूर है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आयोजन की सूचना सार्वजनिक रूप से कितनी पहुंची, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सवाल यह है कि युवा महोत्सव युवाओं के लिए आयोजित किया गया था या केवल विभागीय रिपोर्ट और सरकारी औपचारिकता पूरी करने के लिए? यदि आयोजन का उद्देश्य प्रतिभाओं को सामने लाना था तो फिर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार क्यों नहीं किया गया? विभागीय अधिकारियों को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। आखिर युवाओं के नाम पर होने वाले आयोजनों में युवा ही दूर रहेंगे तो ऐसे महोत्सव का औचित्य क्या रह जाएगा?
