बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में ‘अन्नदाता’ एक बार फिर अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए कलेक्ट्रेट की दहलीज पर पहुंचने को मजबूर हैं। जिले के रामचंद्रपुर ब्लॉक के लगभग 50 से अधिक किसानों ने अपनी गाढ़े पसीने की कमाई और धान की राशि न मिलने से नाराज होकर आज कलेक्ट्रेट कार्यालय का जोरदार घेराव किया। इन पीड़ित किसानों का गंभीर आरोप है कि सहकारी बैंक में उनके नाम पर फर्जी तरीके से लोन (ऋण) निकाला गया है, जिसके कारण खरीफ सीजन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर बेची गई उनके धान की राशि का भुगतान आज तक नहीं हो पाया है।
पिछले एक महीने से बैंक और सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे इन किसानों को जब इस बात की भनक लगी कि उनके नाम पर ऐसा कर्ज दर्ज है जो उन्होंने कभी लिया ही नहीं, तो उनके होश उड़ गए। हद तो तब हो गई जब यह बात सामने आई कि एक किसान जो उस दौरान जेल में निरुद्ध था, उसके नाम पर भी जालसाजों ने लोन की राशि निकाल ली।
इस पूरे फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच तो शुरू कराई, लेकिन इस जांच का खामियाजा भी सीधे तौर पर निर्दोष किसानों को ही भुगतना पड़ रहा है। जांच के नाम पर प्रशासन ने इन पीड़ित किसानों के बैंक खातों को होल्ड (फ्रीज) कर दिया है, जिससे वे अपनी ही जमा पूंजी निकालने से महरूम हो गए हैं। किसानों का साफ कहना है कि बैंक खाते होल्ड होने से उनका क्या लेना-देना, जब उन्होंने कोई लोन लिया ही नहीं तो उसकी सजा उन्हें क्यों दी जा रही है। इधर, कलेक्ट्रेट में हंगामे और प्रदर्शन की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त तहसीलदार जितेंद्र डहरिया किसानों से चर्चा करने पहुंचे।
उन्होंने किसानों से मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया एक सूत्रीय मांग का ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया कि इसे नियमानुसार राज्य सरकार को भेजा जाएगा। इसके साथ ही पीड़ित किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही कलेक्टर के समक्ष सीधे अपनी बात रखेगा। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में किसानों का इस तरह परेशान होना नई बात नहीं है, लेकिन अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले में जवाबदेही तय करें और फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करते हुए किसानों के खाते बहाल कराएं, ताकि वे आगामी खरीफ फसल की तैयारी बिना किसी आर्थिक तंगी के समय पर कर सकें।
