सूरजपुर। आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच रामनगर में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा का गुरुवार, 5 नवंबर को हर्षोल्लास के साथ भव्य समापन हुआ। नौ दिवसीय इस धार्मिक आयोजन ने न केवल रामनगर, बल्कि आसपास के गांवों को भी भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। कथा के शुभारंभ से लेकर अंतिम दिन तक श्रद्धालुओं की ऐसी भीड़ उमड़ती रही कि पूरा आयोजन स्थल रामभक्तों से भरा नजर आया। प्रतिदिन हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने अंतरराष्ट्रीय कथा प्रवक्ता पूज्य प्राची देवी के श्रीमुख से रामायण के विभिन्न प्रसंगों का श्रवण कर धर्म, मर्यादा, त्याग, प्रेम और आदर्श जीवन की सीख प्राप्त की।
आयोजन का शुभारंभ 26 अक्टूबर को निकाली गई विशाल कलश शोभायात्रा के साथ हुआ था। डीजे की धुन, भक्ति गीतों और जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष के बीच निकली इस भव्य शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं की सहभागिता और सिर पर कलश धारण कर निकली श्रद्धालुओं की टोली ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक उत्सव के रंग में रंग दिया। शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला। इसी भक्तिमय वातावरण के साथ 27 अक्टूबर से संगीतमय श्रीराम कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ।
नौ दिनों तक चली कथा में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े संपूर्ण रामायण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचिका प्राची देवी ने अपनी ओजस्वी वाणी, संगीतमय प्रस्तुति और सरल शैली से श्रद्धालुओं को कथा से इस तरह जोड़े रखा कि प्रतिदिन कथा पंडाल में भक्तों की भारी भीड़ जुटती रही। भगवान श्रीराम के आदर्श, माता-पिता के प्रति कर्तव्य, भाईचारा, त्याग, वनवास, भक्त हनुमान की भक्ति, रावण वध और रामराज्य जैसे प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। कथा के दौरान भक्ति संगीत और प्रसंगों की जीवंत प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
इस आयोजन की खास बात यह भी रही कि कथा के दौरान प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, स्थानीय विधायक भूलन सिंह मरावी, भाजपा नेता रामसेवक सहित क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने भी पहुंचकर कथा श्रवण किया। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। वहीं, बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की नियमित सहभागिता ने इसे क्षेत्र का यादगार धार्मिक आयोजन बना दिया।
इतने बड़े आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया। राधा कृष्ण सेवा समिति की ओर से प्रतिदिन भंडारे एवं प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई थी। कथा श्रवण के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के बैठने और अन्य आवश्यक सुविधाओं का बेहतर प्रबंध किया गया, ताकि दूर-दराज के गांवों से पहुंचने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आयोजन समिति के सदस्यों और सहयोगियों ने पूरे नौ दिनों तक व्यवस्थाओं को संभालने में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रतिदिन हजारों लोगों की उपस्थिति के बावजूद भोजन, प्रसाद और कथा श्रवण की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखना समिति की सामूहिक मेहनत और समर्पण को दर्शाता है।
रामनगर में धार्मिक आयोजनों की यह परंपरा लगातार मजबूत होती जा रही है। इससे पहले पिछले दो वर्षों में यहां भागवत कथा और शिव कथा का सफल आयोजन किया जा चुका है। इस बार श्रीराम कथा में उमड़ी भीड़ ने पिछले आयोजनों के उत्साह को भी पीछे छोड़ दिया। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और आसपास के गांवों से मिली व्यापक सहभागिता ने यह साबित किया कि क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। इस बार का आयोजन सहभागिता, व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं के उत्साह के लिहाज से विशेष रूप से यादगार रहा।
राधा कृष्ण सेवा समिति, रामनगर के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान का समापन भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ हुआ। आयोजन के अंतिम चरण में हवन एवं पूर्णाहुति के साथ नौ दिवसीय श्रीराम कथा को विराम दिया गया। कथा के सफल आयोजन से उत्साहित श्रद्धालुओं और समिति के सदस्यों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता साफ नजर आई। आयोजन ने केवल धार्मिक वातावरण ही नहीं बनाया, बल्कि गांवों के लोगों को एक मंच पर जोड़ने, आपसी सद्भाव बढ़ाने और सामूहिक सहभागिता की सुंदर मिसाल भी प्रस्तुत की।
कुल मिलाकर रामनगर की यह संगीतमय श्रीराम कथा श्रद्धा, समर्पण, अनुशासन और सामूहिक प्रयास का ऐसा यादगार अध्याय बन गई, जिसकी गूंज लंबे समय तक क्षेत्र में बनी रहेगी। विशाल कलश शोभायात्रा से शुरू हुआ भक्ति का यह सफर हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता, प्रतिदिन भंडारे की सेवा और भावपूर्ण कथा श्रवण के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। राधा कृष्ण सेवा समिति ने एक बार फिर साबित किया कि सामूहिक संकल्प, सेवा भावना और जनसहयोग से धार्मिक आयोजन को किस तरह भव्य और यादगार बनाया जा सकता है।
