रायगढ़। औद्योगिक सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले पूंजीपतियों के खिलाफ पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। जिले के पूंजीपथरा थाना क्षेत्र के चिराईपानी स्थित ‘ओम श्री रूपेश स्टील कंपनी’ में हुए दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। लेबर क्वार्टर पर बाउंड्री वॉल गिरने से एक महिला मजदूर की मौत और दो अन्य के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में पुलिस ने क्रेशर प्लांट के संचालकों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना है। मर्ग जांच में लापरवाही के पुख्ता सबूत मिलने के बाद आज रविवार को कंपनी के संचालक दयानंद अग्रवाल और शंकर अग्रवाल के खिलाफ धारा 106(1) (लापरवाही से मौत) और 125(ए) (जान जोखिम में डालना) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध क्रमांक 148/2026 दर्ज कर लिया गया है।
यह कानूनी कार्रवाई उस भयावह हादसे के बाद हुई है, जिसने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी थी। बीते 18 जून को क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश के दौरान महालक्ष्मी कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड की भारी-भरकम बाउंड्री वॉल अचानक ढह गई थी। दीवार से सटकर बने लेबर क्वार्टर इसकी चपेट में आ गए, जिससे वहां रह रहे मजदूर रंभा यादव, सुनील परमार और उनकी पत्नी रिंकी डेलकी मलबे में जिंदा दफन हो गए। आनन-फानन में तीनों को मेडिकल कॉलेज रायगढ़ ले जाया गया, लेकिन बदकिस्मती से पहाड़ लुडेग (लैलूंगा) की रहने वाली 30 वर्षीय रंभा यादव ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, सुनील और रिंकी अब भी अस्पताल में गंभीर हालत में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
थाना पूंजीपथरा में दर्ज मर्ग क्रमांक 41/2026 की शुरुआती जांच में यह साफ हो गया कि यह महज़ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानव निर्मित लापरवाही थी। आरोपी संचालकों ने बिना किसी तकनीकी और सुरक्षा मापदंडों का पालन किए, दूसरी कंपनी की ऊंची दीवार से बिल्कुल सटाकर क्रेशर प्लांट के मजदूरों के लिए असुरक्षित क्वार्टर बना दिए थे। फिलहाल, पुलिस मामले की चौतरफा घेराबंदी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रकरण के सभी तकनीकी, वैधानिक और इंजीनियरिंग पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। विवेचना के दौरान मिलने वाले फॉरेंसिक और जमीनी साक्ष्यों के आधार पर आगे आरोपियों की गिरफ्तारी सहित अन्य कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
