जन अधिकार यात्रा का (उदयपुर)

जन अधिकार यात्रा का उदयपुर आगमन
क्षेत्र के लोगों ने किया शानदार स्वागत
उदयपुर (अम्बिकापुर)

26 जनवरी को रायगढ़ से आरंभ छत्तीसगढ़ जन अधिकार यात्रा का रविवार दोपहर को उदयपुर आगमन हुआ। यात्रा के काफिले में शामिल लोगों का स्थानीय जन समुदाय ने ढोल नगाड़ों के साथ अभूतपूर्व स्वागत किया। जन यात्रा का काफिला उदयपुर के नवनिर्मित बस स्टैण्ड से निकलकर नगर भ्रमण करते हुये और लड़ेंगे जीतेंगे जैसे गगनभेदी नारों के साथ पदयात्रा सीता बेंगरा रामगढ़ पहुंचा । जहां लुण्ड्रा, लखनपुर, बतौली, मैनपाठ आदि विकास खण्ड से आये लगभग 500 ग्रामीणों ने पदयात्रियों की अगवानी की। यात्रा रामगढ़ जाकर सभा के रूप में तब्दील हो गया। छत्तीसगढ़ जन अधिकार यात्रा की प्रमुख मांगों में पात्र परिवार को राशन कार्ड जारी कर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित कराना, मिट्टी तेल, चना का नियमित वितरण, प्रत्येक गर्भवती एवं धात्री महिला को छः हजार रूपये का मातृत्व लाभ निःशर्त दिया जाना, आंगनबाड़ी केन्द्रांे एवं स्कूलों में दिये जाने वाले मध्यान्ह भोजन में नियमित पौष्टिक आहार के साथ पानी एवं शौचालय की उपलब्धता सुनिश्चित कराना। पेशनधारियों को नियमित पेंशन, मनरेगा के मजदूरों का मजदूरी भुगतान 15 दिवस के भीतर सुनिश्चित कराना, 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना, मजदूरी भुगतान में विलंब की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान, पेसा कानून और वन अधिकार मान्यता कानून का सख्ती से पालन। शासकीय सेवा में पदस्थ डाॅक्टरों का निजी प्रेक्टिस पर रोक लगाना, निजी अस्पतालों पर सरकार का सख्ती से नियंत्रण। सुखे से प्रभावित किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी एवं पर्याप्त मुआवजा देना।  श्रम, कंपनी, पर्यावरण संरक्षण आदि कानूनों में जनविरोधी संशोधन न की जाये। पारदर्शिता, जवाबदेही एवं शिकायत निवारण की व्यवस्था को सख्ती से लागू हो तथा सूचना का अधिकार कानून से छेड़छाड़ न हो। खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा आदि में उपयुक्त बजट का प्रावधान शामिल है। सभा को संबोधित करते हुये  विभिन्न वक्ताओं ने इस अधिकार यात्रा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि हाल के वर्ष में छत्तीसगढ़ में जन अधिकारों पर संकट बढ़ता जा रहा है। खाद्य सुरक्षा स्वास्थ्य शिक्षा आजीविका जनता के मुलभूत अधिकार है परंतु आम जनता इन अधिकारों से वंचित होती जा रही है। इन अधिकारों से जुड़ी शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन कमजोर होता जा रहा है। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा इन योजनाओं के बजट में लगातार कटौती की जा रही है। सुखे की समस्या झेल रहे प्रदेश में किसान आत्महत्या करने को विवश हो रहे है। सत्यापन के नाम पर लाखों परिवारों के राशन कार्ड निरस्त कर दिये गये है। मनरेगा का हाल बेहाल है लाखों मजदूरों की मजदूरी समय पर नहीं मिल पा रही है। मंहगे ईलाज के साथ महिलायें हिंसा व असुरक्षा की स्थिति से गुजर रही है। प्रदेश में मध्यान्ह भोजन व आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी बच्चों को पोषक आहार दिये जाने का दावा किया जाता है इसके बावजूद प्रदेश के बच्चे काफी संख्या में कुपोषण के शिकार है। षडयंत्र पूर्वक विकास के नाम पर औद्योगिकीकरण कर आदिवासी किसानों को जल जंगल जमीन से बेदखल किया जा रहा है। हर मुद्दे में सरकार का झुकाव जनहित से ज्यादा औद्योगिक घरानों के प्रति ज्यादा दिखाई दे रहा है। इसके कई उदाहरण प्रदेश में देखने को मिलेंगे। पीढि़यों से जंगल में निवासरत् आदिवासी एवं पिछड़े परिवारों को उनकी पुस्तैनी जमीन से बेदखल कर उन्हे असहाय बना दिया गया है। कहीं खनिज संसाधन के दोहन के नाम पर तो कहीं तरह तरह के उद्योग लगाने के नाम पर। हर जगह शिकार पीढि़यों से निवासरत आदिवासी, पिछड़े गरीब किसान हो रहे है। उद्योगों और खनन् परियोजनाओं से विस्थापित होने वाले परिवारों को पुर्नवास के नाम पर दड़बा नुमा छोटे छोटे घर बनाकर रहने को दिया जा रहा है। जबकि उन परियोजनाओं में कार्य करने वाले लोगों को महलनुमा आलीशान सर्वसुविधायुक्त मकान बनाकर दिये जा रहे है। छत्तीसगढ़ जन अधिकार यात्रा को प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। उदयपुर में कार्यक्रम के पश्चात् यात्रा का काफिला अपने अगले पड़ाव मदनपुर कोरबा की ओर बढ़ चला।  राज्य में विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुये यात्रा का समापन 13 फरवरी 2016 को बुढ़ा तालाब रायपुर में होगा।