इंदौर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक बार फिर ‘ऑन द स्पॉट’ त्वरित फैसला लेने का अंदाज सामने आया है। इंदौर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक पीड़ित महिला की शिकायत पर तुरंत संज्ञान लिया और मौके पर ही मौजूद कलेक्टर को उचित कार्रवाई के निर्देश दे दिए। दरअसल, इंदौर के बड़ा गणपति क्षेत्र में मेट्रो परियोजना के कारण प्रभावित हुई एक महिला प्रीति वर्मा ने मुख्यमंत्री को बीच रास्ते में रोककर अपनी व्यथा सुनाई। महिला ने रोते हुए सीएम को बताया कि मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत उनका मकान तोड़ दिया गया, लेकिन उन्हें प्रशासन की ओर से उचित मुआवजा नहीं मिला।
पीड़िता के अनुसार, इसी क्षेत्र के अन्य प्रभावित परिवारों को जहां 40 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया, वहीं उनके परिवार के लिए केवल 16 लाख रुपये की राशि तय की गई, जो कि पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। अपनी आर्थिक तंगी और घर की बदहाली का हवाला देते हुए प्रीति वर्मा ने मुख्यमंत्री के सामने न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि उनके पिता लकवाग्रस्त हैं और पूरा परिवार इस समय बेहद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। महिला ने प्रशासन की सुस्ती पर भी आरोप लगाया कि इस विसंगति को लेकर वे पिछले तीन महीनों से कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई और मामला लगातार लंबित बना रहा।
पीड़ित महिला के आंसू और उनके परिवार की लाचारी को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भावुक हो गए। उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना कोई देर किए इंदौर कलेक्टर को तुरंत तलब किया और पीड़िता को अन्य परिवारों के समान ही पूरे 40 लाख रुपये का मुआवजा राशि देने के कड़े निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री के इस त्वरित और मानवीय फैसले की अब चारों ओर सराहना हो रही है।
