– विधायक व्यास कश्यप के आरोपों पर गरजी थी भाजपा, अब मामला ठंडे बस्ते में!
जांजगीर-चांपा। भाजपा जिला अध्यक्ष अम्बेश जांगड़े को लेकर कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के मामले में भाजपा की चुनौती अब सवालों के घेरे में आ गई है। जिला अध्यक्ष के बचाव में प्रेसवार्ता कर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विधायक से तीन दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की थी। साथ ही माफी नहीं मांगने पर विधायक कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया गया था। लेकिन तीन दिन की मियाद गुजरने के बाद न तो विधायक ने माफी मांगी और न ही भाजपा की ओर से घोषित आंदोलन या घेराव को लेकर कोई ठोस कदम सामने आया।
दरअसल, विधायक व्यास कश्यप ने भाजपा जिला अध्यक्ष अम्बेश जांगड़े पर एल्डरमैन नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाने के साथ जिला अस्पताल से सरकारी संसाधन के जरिए अपनी गाड़ी में डीजल भरवाने का आरोप लगाया था। आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया था। भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रेसवार्ता कर इन आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताते हुए विधायक से माफी मांगने की मांग की थी।
लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि तीन दिन का अल्टीमेटम आखिर किस लिए था? क्या भाजपा ने अपने ही ऐलान से कदम पीछे खींच लिए हैं? अगर आरोप झूठे थे तो भाजपा अब विधायक के खिलाफ कार्रवाई या घोषित घेराव से पीछे क्यों हट रही है? और यदि आरोपों में दम नहीं है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खारिज करने के लिए भाजपा अब तक कोई ठोस प्रमाण क्यों नहीं रख पाई?
अल्टीमेटम की हवा निकली या रणनीति बदली?
भाजपा की प्रेसवार्ता के बाद जिस मामले में सियासी गर्मी बढ़ी थी, वह अब अचानक ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है। इससे विपक्ष को भी भाजपा पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है। वहीं दूसरी ओर विधायक व्यास कश्यप अपने आरोपों पर कायम नजर आ रहे हैं।
अब निगाहें भाजपा पर टिकी हैं कि वह अपने तीन दिन वाले ऐलान को अमल में लाती है या फिर मामला बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा। क्या भाजपा अपने ही दावे से पीछे हट गई है, या फिर पर्दे के पीछे कोई नई राजनीतिक रणनीति तैयार हो रही है? आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि भाजपा आरोपों को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ती है या यह मुद्दा भी सियासी फाइलों में दबकर रह जाता है।
