रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए मौसम विभाग की नई तारीखों ने सस्पेंस बढ़ा दिया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, सिस्टम में आ रहे बदलावों के कारण विभाग को रोज मानसून पहुंचने की तारीख आगे बढ़ानी पड़ रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून के बस्तर संभाग में दस्तक देने की मजबूत संभावना बनी हुई है। फिलहाल जून के महीने में व्यापक प्री-मानसून बारिश न होने की वजह से पूरे प्रदेश में तीखी गर्मी और भारी उमस का दौर जारी है, जिसने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।
इसी बीच राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला है। बुधवार की शाम रायपुर में करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज आंधी के साथ हल्की बारिश दर्ज की गई। इस अंधड़ के कारण जीई रोड पर कई पोस्टर और होर्डिंग्स फट गए और कई इलाकों में देर तक बिजली गुल रही। राजधानी में बीती रात 5.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जिसके बाद उमस और ज्यादा बढ़ गई। रायपुर के अधिकांश इलाकों में आज भी आंशिक रूप से बादल छाए रहने और उमस बने रहने का अनुमान है, जबकि गुरुवार को भी यहां अंधड़ के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों की बात करें तो पिछले 24 घंटों में पेंड्रारोड और जगदलपुर में हल्की बारिश हुई, जबकि कुछ स्थानों पर सिर्फ बूंदाबांदी होकर रह गई। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान शंकरगढ़, मंदिर हसौद और खरोरा में सबसे ज्यादा 10-10 मिलीमीटर पानी गिरा। वहीं अम्बिकापुर में 2 सेंटीमीटर, जबकि कापू, रघुनाथनगर, लखनपुर, छुरा, बतौली, सरिया और कुसमी में एक-एक सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके उलट, उत्तर छत्तीसगढ़ में धूप के तेवर तीखे रहे और अधिकतम तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखी गई। प्रदेश में सबसे ज्यादा 43.5 डिग्री सेल्सियस तापमान राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस अम्बिकापुर में रहा।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं, अगले दो दिनों में हवा की गति और उग्र होकर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की भी संभावना जताई गई है, जिससे मानसून के आने तक मौसम में यह उतार-चढ़ाव लगातार बना रहेगा।
