सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में सूरजपुर जिले का प्रतापपुर क्षेत्र शुक्रवार तड़के अचानक पथराव और लाठियों की गूँज से दहल उठा। मदननगर-धरमपुर इलाके में भूमि अधिग्रहण और सर्वे की प्रशासनिक कार्रवाई करने पहुँचे पुलिस बल पर आक्रोशित ग्रामीणों ने जानलेवा हमला बोल दिया। देखते ही देखते पूरा इलाका युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। ग्रामीणों द्वारा किए गए भारी पथराव लाठी-डंडों के हमले में डीएसपी राजेश जोशी समेत दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों में कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जिनमें से कई जवानों के सिर फटने और गंभीर चोटें आने की खबर है।
जमीन पर कब्जा लेने और प्रशासनिक टीम को सुरक्षा देने पहुँचे पुलिस बल को अंदाजा भी नहीं था कि ग्रामीणों की नाराजगी इस कदर हिंसक रूप ले चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे लंबे समय से इस भूमि अधिग्रहण का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे, लेकिन शुक्रवार सुबह तड़के प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ अचानक कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस की इस सरप्राइज एंट्री से ग्रामीण उग्र हो गए और उन्होंने चारों तरफ से पुलिस टीम को घेरकर पत्थरों की बरसात कर दी।
अचानक हुए इस ताबड़तोड़ हमले से मौके पर मौजूद पुलिस बल में भगदड़ मच गई। जान बचाने की कोशिश और मची अफरा-तफरी के बीच कई जवान जमीन पर गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक हलके और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में घायल जवानों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया, जहाँ से गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मियों को उच्च इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल अम्बिकापुर रेफर किया गया है।
हिंसक झड़प के बाद इलाके में अत्यधिक तनाव व्याप्त हो गया है, जिसके चलते फिलहाल भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई को रोक दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे धरमपुर-मदननगर क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है। बिगड़े हालात पर काबू पाने के लिए सूरजपुर समेत आसपास के 5 जिलों की अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स को मौके पर तैनात किया गया है। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी खुद घटनास्थल पर डेरा डाले हुए हैं और पूरे इलाके पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
