अम्बिकापुर। सीमित संसाधन, गाँव का कच्चा मैदान और आँखों में बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना। इसी जज्बे के दम पर सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चलता निवासी राहुल प्रधान ने इतिहास रच दिया है। एक साधारण किसान घनश्याम प्रधान के पुत्र और प्रतिभाशाली विकेटकीपर-बल्लेबाज राहुल का चयन छत्तीसगढ़ की रणजी क्रिकेट टीम में बतौर बल्लेबाज हुआ है। राहुल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की खबर मिलते ही उनके परिवार सहित पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है।
राहुल के भीतर क्रिकेट की चिंगारी बचपन में अपने पिता को खेलते देखकर सुलगी थी। इसके बाद पिता के मार्गदर्शन में घरेलू मैदानों से शुरू हुआ यह सफर स्कूल और स्थानीय स्तर की प्रतियोगिताओं में निखरता चला गया। एक किसान परिवार में जन्म लेने के कारण अभाव हमेशा साथ रहे, लेकिन राहुल के हौसले कभी डिगे नहीं। खेल के प्रति उनकी लगन और असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए तत्कालीन जनपद उपाध्यक्ष शैलेष सिंह ने उन्हें आवश्यक खेल संसाधन उपलब्ध कराए और हरसंभव मदद दी, जिससे राहुल को खेल की बारीकियों को सीखने का अवसर मिला। वहीं, पिता ने भी अभ्यास सत्रों में साथी बनकर बेटे की तकनीकी कमियों को सुधारा और मानसिक रूप से मजबूत बनाया।
मेहनत और निरंतर अभ्यास का सुखद परिणाम जल्द ही मैदान पर नजर आने लगा। स्कूली क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर राहुल ने तीन बार स्टेट और दो बार नेशनल प्रतियोगिताओं में राज्य का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद वे एक वर्ष के लिए छत्तीसगढ़ अंडर-14 तथा दो वर्षों तक अंडर-23 टीम के प्रमुख सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने अपनी आक्रामक और तकनीकी बल्लेबाजी से चयनकर्ताओं को लगातार प्रभावित किया। विभिन्न प्रारूपों में उनके निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए अब चयनकर्ताओं ने उन्हें सीनियर रणजी ट्रॉफी टीम का हिस्सा बनाया है।
अपनी इस सफलता का श्रेय राहुल ने अपने माता-पिता, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष शैलेष सिंह, अपने कोच और गुरुजनों को दिया है। अभावों को पीछे छोड़ते हुए सीतापुर का नाम पूरे प्रदेश में रोशन करने वाले बाएं हाथ के इस होनहार खिलाड़ी की नजरें अब भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करने पर टिकी हैं।
