जांजगीर-चांपा। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और निजी अस्पतालों की व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर चौक के पास संचालित श्री मल्टी स्पेशलिटी बर्न एवं ट्रामा सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। अस्पताल में बर्न एवं ट्रामा जैसी गंभीर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने का दावा किया जाता है, लेकिन इन विभागों के लिए आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता ही सवालों के घेरे में है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना मरीजों का इलाज किसके भरोसे किया जा रहा है?
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में मरीजों के परिजनों से इलाज के नाम पर मोटी फीस वसूली जाती है। लेकिन जब मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब जरूरत के अनुसार ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और सर्जन को फोन कर बुलाने की बात सामने आई है। कई बार आपातकालीन स्थिति में डॉक्टरों के देरी से पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। गंभीर मरीजों के मामले में डॉक्टरों की उपलब्धता में देरी उनकी जान पर भारी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के नाम पर अस्पताल, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता पर सवाल…
स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी में शुरुआत में केवल पांच डॉक्टरों की उपलब्धता बताई गई थी। इनमें भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद विभाग ने अस्पताल संचालक को दोबारा नोटिस जारी कर मल्टी स्पेशलिटी के साथ बर्न एवं ट्रामा यूनिट के संचालन के लिए आवश्यक स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जानकारी मांगी।
नियमों के मुताबिक मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में छह विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनिवार्यता बताई गई है। इसके अलावा बर्न यूनिट के लिए विशेषज्ञ मेडिसिन डॉक्टर के साथ प्लास्टिक सर्जन की उपलब्धता जरूरी है। वहीं ट्रामा यूनिट में आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ, ऑर्थोपेडिक डॉक्टर, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जरी में प्रशिक्षित डॉक्टर, रेडियोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ और जनरल सर्जन जैसे विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा ट्रामा यूनिट के लिए केवल पांच डॉक्टरों की उपलब्धता बताई गई है। शेष डॉक्टरों को ऑन कॉल बुलाने की बात सामने आई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब गंभीर मरीज को तत्काल विशेषज्ञ की जरूरत पड़ेगी, तब फोन पर बुलाए जाने वाले डॉक्टर कितनी देर में अस्पताल पहुंचेंगे?
जिला अस्पताल के डॉक्टर की निजी अस्पताल में पार्ट टाइम सेवा का मामला भी आया सामने….
स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण मामला सामने आया। जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. शाहबाज खांडा श्री मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में भी पार्ट टाइम सेवाएं दे रहे थे। मामला सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित डॉक्टर को नोटिस जारी किया। इसके बाद डॉक्टर द्वारा शासकीय सेवा से त्यागपत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस घटनाक्रम ने सरकारी अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टरों की निजी अस्पतालों में सेवाओं को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं अन्य पार्ट टाइम डॉक्टरों के संबंध में भी विभाग को पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई।अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग आमने-सामने
वहीं सीएमएचओ डॉ. अनिता श्रीवास्तव का कहना है कि बर्न एवं ट्रामा से संबंधित डॉक्टरों की जानकारी अस्पताल संचालक से मांगी गई है। जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों के नाम पर वसूली जा रही मोटी फीस, जवाबदेही किसकी?
श्री मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में केवल पांच डॉक्टरों की उपलब्धता बताई जाना और बाकी डॉक्टरों को ऑन कॉल बुलाने की व्यवस्था कई सवाल खड़े करती है। आखिर जिस अस्पताल के नाम में मल्टी स्पेशलिटी, बर्न और ट्रामा जैसी गंभीर चिकित्सा सुविधाएं जुड़ी हैं, वहां मरीजों को तत्काल विशेषज्ञ सेवाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं?
पांच डॉक्टरों का नाम ही नही सीएमएचओ कार्यालय में…
हॉस्पिटल प्रबंधन ने अस्पताल खोलने से पहले सभी डॉक्टरों की एवं अस्पताल की जानकारी प्रमाण पत्र अभिमत एवं सुविधाओं की जानकारी लिखित में सीएमएचओ कार्यालय में जमा करना होता है, लेकिन प्रबंधक ने कार्यालय में अधिकारी को 12 डॉक्टर कार्यरत होने की जानकारी दिया है लेकिन कार्यालय में सिर्फ सात डॉक्टरो की एग्रीमेंट जमा है, बाकी अस्पताल प्रबंधक झूठी जानकारी कार्यालय को दिया है, इस पर भी कड़ी से गाड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
यदि अस्पताल में आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टर और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं हैं तो बर्न एवं ट्रामा यूनिट के संचालन की अनुमति और उसकी वास्तविक व्यवस्था की जांच क्यों नहीं की जा रही है?
स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल नोटिस जारी करने की नहीं, बल्कि अस्पताल की वास्तविक व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच कर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। क्योंकि चिकित्सा सुविधा के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूलना और आपातकाल में डॉक्टरों को फोन कर बुलाना किसी भी स्थिति में सामान्य व्यवस्था नहीं मानी जा सकती।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग नोटिस और जवाब तक सीमित रहता है या अस्पताल की विशेषज्ञ डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और बर्न-ट्रामा यूनिट की वास्तविक व्यवस्था की गहन जांच कर ठोस कार्रवाई भी करता है।
