बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान हुई रिकॉर्ड तोड़ मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को घुटनों पर ला दिया है। आधुनिक विकास और स्मार्ट सिटी के तमाम बड़े दावों को जलमग्न करती हुई इस आसमानी आफ़त ने न केवल करोड़ों रुपये की संपत्ति को मलबे और कीचड़ में तब्दील कर दिया, बल्कि एक बुजुर्ग महिला की असमय मौत से पूरे प्रशासनिक अमले को कठघरे में खड़ा कर दिया है। गुरुवार से शुरू हुआ बारिश का यह तांडव शुक्रवार तक इस कदर खौफनाक रूप अख्तियार कर चुका था कि जिन संभ्रांत कॉलोनियों में पिछले दो दशकों से पानी की एक बूंद जमा नहीं हुई थी, वहां छह से आठ फीट तक गहरा समंदर नजर आने लगा। लोग अपने ही आशियानों में कैद होकर रह गए और परिवारों को अपनी जान बचाने के साथ-साथ गृहस्थी के कीमती सामान को समेटने के लिए पूरी रात भीषण जद्दोजहद करनी पड़ी।
इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे हृदयविदारक घटना लिंगियाडीह इलाके में सामने आई, जहां शीला अपार्टमेंट के पास उफनते नाले को पार करने की कोशिश में 65 वर्षीय प्रमिला बाई तेज बहाव की चपेट में आ गई। सुबह काम पर निकलने की उनकी दैनिक दिनचर्या उस समय एक खौफनाक हादसे में बदल गई जब नाले के अप्रत्याशित करंट ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया। कई घंटों की सघन खोजबीन के बाद राजकिशोर नगर स्थित ऊर्जा पार्क के पास अरपा नदी की घनी झाड़ियों में फंसा उनका निर्जीव शरीर बरामद हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा की आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया, लेकिन इस त्रासद मौत ने मानसून पूर्व सुरक्षा इंतजामों की पोल पूरी तरह से खोलकर रख दी है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और नगर निगम के जल निकासी दावों पर सबसे बड़ा तमाचा यह है कि पिछले तीन वर्षों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए लगभग 18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि पानी की तरह बहाई गई थी, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
शहर के मुख्य रिहायशी क्षेत्रों जैसे देवनंदन नगर फेस-1 और 2, गीतांजलि सिटी, फ्रेंड्स कॉलोनी, गुरु विहार, वसंत विहार, सरोज विहार, जोरापारा, जबड़ापारा, अरपापार, रायपुर रोड और सकरी सहित तमाम बाहरी इलाकों में हालात इस कदर बदतर हो गए कि नगर निगम का पूरा तंत्र घुटने टेक चुका था। सैकड़ों घरों के ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह पानी में डूब चुके थे, जिससे फ्रिज, वॉशिंग मशीन, सोफे और महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कबाड़ में तब्दील हो गए। जान बचाने के लिए नागरिकों को पहली और दूसरी मंजिलों पर शरण लेनी पड़ी। जब हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे, तब राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को शहर की संकरी गलियों और आलीशान कॉलोनियों के भीतर नावें उतारनी पड़ीं। आपदा प्रबंधन दल ने साहस का परिचय देते हुए बंधवापारा, जगदंबा कॉलोनी, विजयापुरम और चौबे कॉलोनी जैसे क्षेत्रों से 204 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस रेस्क्यू ऑपरेशन की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पानी से घिरे एक मकान में गंभीर रूप से तड़प रहे मरीज तक टीम ने नाव के जरिए समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।
इस भीषण जलप्लावन ने नगर निगम की उन ड्रेनेज परियोजनाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिनके नाम पर पिछले तीन साल में 18 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। अधूरे पड़े बड़े नालों के निर्माण, पुराने और संकरे हो चुके निकास तंत्र तथा ओवरलोडेड ड्रेनेज लाइनों की वजह से लिंक रोड, पुराना बस स्टैंड, तालापारा और यदुनंदन कॉलोनी जैसे व्यापारिक केंद्र पूरी तरह ठप हो गए। बारिश थमने के बाद भी नागरिकों की अंतहीन मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। घरों में जमा बदबूदार पानी को बाहर निकालने, जमा हुई गाद और कीचड़ को साफ करने में लोगों का पूरा दिन बीत गया। शिवम होम्स और बंधवापारा के कई नागरिक लगातार दूसरी रात भी अपने ही घरों की ऊपरी मंजिलों पर बंधक की तरह रहने को मजबूर दिखे, क्योंकि निचले रास्तों से पानी पूरी तरह उतरा नहीं था। सुरक्षा के मद्देनजर शहर के शनिचरी, व्यापार विहार और एसबीआर कॉलेज सब-स्टेशन सहित प्रमुख विद्युत ग्रिडों को बंद करना पड़ा, क्योंकि 17 बड़े ट्रांसफार्मर पूरी तरह पानी में डूब चुके थे। बिजली गुल होने से पेयजल आपूर्ति ठप हो गई और लोगों को पीने के पानी के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ा, जिसने बच्चों, बीमारों और बुजुर्गों की लाचारी को चरम पर पहुंचा दिया।
इस आपदा का व्यापक असर बिलासपुर के परिवहन और रेल नेटवर्क पर भी देखा गया। बिलासपुर-कोरबा और बिलासपुर-रायगढ़ राष्ट्रीय राजमार्गों के ऊपर बाढ़ का पानी बहने के कारण छत्तीसगढ़ का यह लाइफलाइन रूट पूरी तरह बाधित हो गया। कुटीघाट में लीलागर नदी के ऊपर बने पुल पर तीन से चार फीट तक पानी का उग्र प्रवाह होने से आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया। वहीं दूसरी ओर, बिलासपुर रेलवे यार्ड और मुख्य स्टेशन परिसर के ट्रैक पानी में डूब जाने के कारण दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को सात महत्वपूर्ण यात्री ट्रेनों को आनन-फानन में रद्द करना पड़ा, जबकि चार एक्सप्रेस ट्रेनों के रूट बदले गए और कई ट्रेनों को बीच रास्ते में ही शॉर्ट-टर्मिनेट करना पड़ा। इस प्रशासनिक नाकामी और नागरिक बेबसी को लेकर शहर में राजनीतिक पारा भी पूरी तरह गर्म हो चुका है; विपक्ष ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी के कर्ताधर्ताओं पर भ्रष्टाचार और अदूरदर्शिता का खुला आरोप लगाते हुए शहर को आपदा के मुंह में धकेलने का जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों में जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और पुलिस ने संयुक्त मोर्चा संभालते हुए प्रभावितों के बीच 1700 से अधिक फूड पैकेट वितरित किए और राहत शिविरों में बुनियादी सुविधाएं प्रदान कीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा अगले 24 घंटों के लिए जारी किए गए भारी बारिश के ‘रेड अलर्ट’ ने बिलासपुर संभाग के नागरिकों और प्रशासन दोनों की सांसें अटका रखी हैं।
