बीजापुर। बस्तर के घने बीहड़ों में जब बारिश और दलदल ने रास्ते रोक दिए, तो व्यवस्थाओं से दूर खड़े नक्सल पीड़ितों के बीच मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं का काफिला उम्मीद बनकर पहुंचा। यमपुर (पामेड़) से नेलाकांकेर तक के दुर्गम सफर में गाड़ियां कीचड़ में धंसीं और एक वाहन खराब भी हुआ, लेकिन कदम रुके नहीं। मंगलवार शाम डॉ. साईं सीधे उन घरों के आंगनों में पहुंचे, जिनके अपनों को नक्सली हिंसा ने हमेशा के लिए छीन लिया था।
इस मानवीय दौरे का सबसे भावुक पल ग्राम नेलाकांकेर में देखने को मिला। यहाँ वर्ष 2026 में नक्सली हिंसा का शिकार हुए 40 वर्षीय तिरुपति सोढ़ी के शोकाकुल परिवार से मुलाकात के दौरान डॉ. प्रेमा साईं ने एक बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने घोषणा की कि वे तिरुपति की बेटी संध्या के विवाह का सारा खर्च स्वयं वहन करेंगे और पिता तुल्य बनकर उसका कन्यादान भी करेंगे। इस आत्मीय पहल ने पीड़ित परिवार को गहरा ढांढस बंधाया। ग्रामीणों ने भी पारंपरिक और भव्य तरीके से उनका स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इससे पहले ग्राम यमपुर (पामेड़) में डॉ. साईं ने वर्ष 2025 में नक्सली हमले में जान गंवाने वाले सुन्नम सम्मैया और वेक्को संदीप के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने सम्मैया की पत्नी नर्सम्मा व उनके दो मासूम बच्चों और वेक्को संदीप की पत्नी आरती व उनके 9 वर्षीय बेटे की व्यथा सुनी। दोनों परिवारों को तात्कालिक संबल देते हुए 21-21 हजार रुपये की नकद आर्थिक सहायता प्रदान की गई। साथ ही महिलाओं को साड़ियां, बच्चों को जूते-चप्पल और स्कूल बैग सहित पेन, कॉपी व कंपास बॉक्स वितरित किए गए। ग्रामीणों को दिव्य कवच व भभूति बांटने के बाद डॉ. साईं ने जमीन पर बैठकर उनके साथ भोजन किया और उनकी समस्याएं जानीं।
दौरे के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते हुए डॉ. प्रेमा साईं ने बस्तर में लौटती शांति का श्रेय केंद्र और राज्य नेतृत्व को दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा का उल्लेख करते हुए उन्हें ‘देव पुरुष’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति से बस्तर में सामान्य जीवन की उम्मीद जगी है, और विकास तथा शांति की इस बयार का पहला हक यहां के सीधे-सादे ग्रामीणों व हिंसा के पीड़ितों को ही मिलना चाहिए।
