नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में विकास की रफ्तार को गति देने के लिए प्रस्तावित बाईपास मार्ग के निर्माण की तैयारियां तेज हो गई हैं। गुरिया-कनेरा-करलखा-दुगाबेंगाल-गरांजी-गढ़बेंगाल (एसएच-05) को नेशनल हाईवे-130 से जोड़ने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना को सुचारू रूप से अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासनिक मुस्तैदी भी दिखनी शुरू हो गई है। भू-अर्जन यानी भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, विवादमुक्त और निष्पक्ष रखने के उद्देश्य से नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने एक बड़ा और सख्त प्रशासनिक आदेश जारी किया है। इस नए आदेश के तहत, प्रस्तावित बाईपास परियोजना से प्रभावित होने वाली सभी जमीनों के हस्तांतरण और उनके स्वरूप में बदलाव करने पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
कलेक्टर द्वारा की गई यह कड़ी कार्रवाई छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के उन दिशा-निर्देशों के अनुरूप है, जो जनहित की परियोजनाओं को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। नियमों के मुताबिक, जब भी किसी सार्वजनिक या लोक प्रयोजन के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव सामने आता है या उसकी अधिसूचना जारी की जाती है, तो संबंधित जमीनों के स्वामित्व और उनके मूल उपयोग में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता। प्रशासन का यह कदम भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित भू-विवाद को रोकने और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
गौरतलब है कि लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़क) नारायणपुर संभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल इस महत्वाकांक्षी एसएच-05 बाईपास परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का औपचारिक प्रस्ताव दिया गया है, जिस पर वर्तमान में भू-अर्जन की कानूनी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। नए प्रशासनिक आदेश के लागू होने के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों में जमीनों की खरीदी-बिक्री, दान, आपसी बंटवारा, खाता विभाजन, भूमि डायवर्शन (व्यपवर्तन) और किसी भी प्रकार की खनन गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक रहेगी। इतना ही नहीं, इन जमीनों से जुड़े जितने भी मामले वर्तमान में विभिन्न राजस्व न्यायालयों या कार्यालयों में लंबित हैं, उन पर भी कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कलेक्टर नम्रता जैन ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को इस आदेश का कड़ाई से पालन करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाले किसी भी मामले में कोई ढिलाई या कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
