नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर आगामी 1 जुलाई से लागू की जा रही नई योजना ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी योजना’ (वीबी-जी राम जी) पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस नई योजना को लेकर विपक्षी दलों के अलावा खुद भाजपा शासित राज्यों ने भी गंभीर आपत्तियां जताई हैं। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्र सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि बिना व्यापक परामर्श और संसदीय समीक्षा के मनरेगा को खत्म करने वाला विधेयक संसद से पारित करा दिया गया, जिसके कारण अब राज्यों के बीच असंतोष गहराता जा रहा है।
जयराम रमेश के मुताबिक, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने इस नई व्यवस्था के तहत उन पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को लेकर चिंता व्यक्त की है। कई राज्यों को आशंका है कि योजना के संचालन और वित्तपोषण में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाए जाने से उनके बजटीय संतुलन पर विपरीत असर पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह केंद्रीकृत हो जाएगी। कांग्रेस नेता ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के गृह राज्य की ओर से भी इस योजना के व्यावहारिक पहलुओं को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
योजना के तकनीकी नियमों पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस ने कहा कि चार राज्य सरकारों ने खेती के चरम मौसम (पीक सीजन) के दौरान प्रस्तावित ‘ब्लैकआउट अवधि’ का कड़ा विरोध किया है। राज्यों का मानना है कि इस संवेदनशील अवधि में रोजगार उपलब्ध न होने से ग्रामीण श्रमिकों और किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। इसके साथ ही, बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की ऊंची लागत को देखते हुए कम से कम पांच राज्यों ने ग्रामीण श्रमिकों की दिहाड़ी (मजदूरी) बढ़ाने की मांग की है ताकि उन्हें पर्याप्त आजीविका सुरक्षा मिल सके। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने यह बड़ा कदम प्रतिशोध और राजनीतिक कारणों से प्रेरित होकर उठाया है, जबकि ग्रामीण रोजगार जैसे संवेदनशील विषय पर कोई भी बदलाव करने से पहले राज्य सरकारों, संसदीय स्थायी समितियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक सहमति बनाना अनिवार्य होना चाहिए था।
