अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के खूबसूरत पर्यटन स्थल मैनपाट में इन दिनों पीलिया (जौंडिस) का खौफनाक कहर देखने को मिल रहा है। पिछले महज एक सप्ताह के भीतर यहाँ के चार अलग-अलग गाँवों में पांच लोगों की असमय मौत हो चुकी है, जिससे पूरे सरगुजा जिले में हड़कंप मच गया है। इस बीमारी की चपेट में आकर जान गंवाने वालों में कुनिया गाँव के पूर्व उपसरपंच जितेंद्र यादव, नर्मदापुर की भाग्यवती यादव, बरिमा गाँव में कक्षा नौवीं का छात्र विकास यादव और बइगहवा गाँव की एक युवती शामिल हैं। हालांकि, प्रशासनिक अमला फिलहाल तीन मौतों की ही पुष्टि कर रहा है, जबकि बाकी दो मामलों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दर्ज़न भर से अधिक ग्रामीण इस समय गंभीर रूप से बीमार हैं और विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इनमें से उदयभान यादव और सुभाष यादव का इलाज अंबिकापुर के माता राजरानी मेमोरियल और जीवन ज्योति हॉस्पिटल में चल रहा है, वहीं कुछ अन्य गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर भी रेफर किया गया है।
इस स्वास्थ्य आपातकाल की भनक लगते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को प्रभावित गांवों का दौरा कर युद्धस्तर पर सर्वे और कैंप लगाने का काम शुरू कर दिया है। सरगुजा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मुताबिक, प्राथमिक जांच में दो मौतें सीधे तौर पर पीलिया से होने की बात सामने आई है, जबकि एक मृतक पहले से ही किसी गंभीर क्रॉनिक बीमारी से पीड़ित था। संक्रमण की असल वजह तलाशने के लिए विभाग ने नर्मदापुर, कुनिया और बरिमा जैसे अत्यधिक प्रभावित इलाकों पर फोकस किया है। दूषित पानी की आशंका को देखते हुए अकेले कुनिया गाँव में चार अलग-अलग जल स्रोतों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि इस जानलेवा बीमारी के फैलने की मुख्य वजह को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।
