रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर इस वक्त एक ऐसे सुरक्षा घेरे में है जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, क्योंकि खुद देश के गृहमंत्री अमित शाह रायपुर के दौरे पर हैं। पूरी राजधानी में हाई अलर्ट है, चप्पे-चप्पे पर खाकी तैनात है और खुद गृहमंत्री पुलिस कप्तानों के साथ कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए मैराथन समीक्षा बैठकें ले रहे हैं। लेकिन ठीक इसी वीआईपी हलचल के बीच, रायपुर की छाती पर बैठे बेखौफ अपराधियों ने सूबे के गृह विभाग और पुलिस प्रशासन के इकबाल को सरेराह नीलाम कर दिया। भाजपा के दिग्गज नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के साथ राजधानी के सबसे पॉश और सुरक्षित माने जाने वाले सिविल लाइंस इलाके में दिनदहाड़े लूट हो गई। बाइक सवार दो बदमाश उनका मोबाइल छीनकर हवा हो गए और पुलिस हमेशा की तरह लकीर पीटती रह गई।
यह वारदात महज एक मोबाइल की लूट नहीं है, बल्कि यह विष्णुदेव साय सरकार और छत्तीसगढ़ पुलिस की उस कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा है जो कागजों पर अपराध कम होने का दावा करती है। बिलासपुर की बिल्हा सीट से चौथी बार के विधायक और सूबे के कद्दावर नेताओं में शुमार धरमलाल कौशिक रोज की तरह शंकर नगर स्थित भारत माता चौक के पास मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। वे अकेले थे और शायद इसी भरोसे में थे कि उनके अपने दल की सरकार है और शहर में देश के गृहमंत्री मौजूद हैं, तो सुरक्षा चाक-चौबंद होगी। लेकिन चंद सेकंड्स के भीतर आए बाइक सवार बदमाशों ने उनके इस भरोसे के परखच्चे उड़ा दिए। जब तक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुछ समझ पाते, लुटेरे कानून के खौफ को ठेंगे पर रखकर रफूचक्कर हो चुके थे।
इस घटना ने रायपुर की जनता के बीच एक बेहद खौफनाक और गलत संदेश भेजा है। आज छत्तीसगढ़ का आम नागरिक यह सोचने पर मजबूर है कि जब सूबे के इतने बड़े रसूखदार जनप्रतिनिधि, जो खुद विधानसभा की आसंदी संभाल चुके हैं, राजधानी की सड़कों पर सुरक्षित नहीं हैं, तो एक अदने से आम आदमी की बिसात ही क्या है? क्या अब रमन राज की वो सुरक्षित राजधानी इतिहास बन चुकी है, जहां लोग बेफिक्र होकर घूमते थे? साय राज में अपराधियों का मनोबल इस कदर सातवें आसमान पर पहुंच चुका है कि उन्हें न तो पुलिस का डर है और न ही इस बात की परवाह कि शहर में खुद देश का सबसे बड़ा ‘इमरजेंसी कमांडर’ (अमित शाह) बैठा हुआ है।
हमेशा की तरह, वारदात के बाद पुलिस का वही रटा-रटाया ढांचा हरकत में आया है। सिविल लाइंस थाना पुलिस अब घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, मौके पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और ‘हर एंगल से जांच’ का झुनझुना थमाया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब गृहमंत्री के दौरे को लेकर इंटेलिजेंस इनपुट थे, सुरक्षा का ढिंढोरा पीटा जा रहा था, तो वीआईपी इलाकों में गश्त क्यों गायब थी? पुलिस की यह नाकामी साफ दर्शाती है कि राजधानी में कानून व्यवस्था का पूरी तरह से जनाजा निकल चुका है। अगर पुलिस इसी सुस्ती और ढुलमुल रवैए से काम करती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब अपराधी थाने के भीतर घुसकर वारदातों को अंजाम देंगे। सरकार को अब आत्ममंथन करना होगा, क्योंकि जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है।
