अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार के राज में सरगुजा जिले की कानून-व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उन्हें न तो खाकी का डर रहा और ना ही सरकार का। ताजा मामला अम्बिकापुर शहर के बीचों-बीच, हृदय स्थल कहे जाने वाले घड़ी चौक का है, जहां कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कांग्रेस के जिला कार्यालय ‘राजीव भवन’ में चोरों ने न सिर्फ तीसरी बार धावा बोला, बल्कि पुलिसिया गश्त का सरेआम मखौल भी उड़ाया। चोरों ने राजीव भवन के बाथरूम से स्टील की 72 टोटियां पार कर दीं और जाते-जाते फर्श पर “I LOVE U AMBIKAPUR” लिखकर सरगुजा पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली को खुली चुनौती दे गए। यह वारदात सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि सरगुजा पुलिस के मुंह पर करारा तमाचा है, जो यह बताने के लिए काफी है कि शहर में पुलिस का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है।
इस शर्मनाक घटना ने सरगुजा की उस खौफनाक तस्वीर को एक बार फिर उजागर कर दिया है, जिससे आज यहां की आम जनता रोजाना दो-चार हो रही है। हाल के दिनों में सरगुजा जिला मर्डर, सरेराह डकैती, चोरी और बेखौफ बदमाशों के बीच खूनी गैंगवार का अड्डा बन चुका है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि स्थानीय लोग अब सरगुजा की तुलना पुराने दौर के यूपी-बिहार के जंगलराज से करने में भी परहेज नहीं कर रहे हैं। जिस वीआईपी इलाके में राजनीतिक दलों के दफ्तर सुरक्षित नहीं हैं, वहां आम नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। शहर की गलियों से लेकर मुख्य चौराहों तक नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का आतंक है, और पुलिस की तथाकथित ‘नाइट पेट्रोलिंग’ सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित नजर आती है।
साय सरकार के सुशासन के दावों के बीच सरगुजा की यह बदहाली अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। विपक्षी पार्टियों के नेता लगातार आवाज उठा रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में सत्ता बदलते ही अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने मौके का मुआयना करने के बाद गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि जब एक राजनीतिक दल का कार्यालय लगातार तीसरी बार निशाना बन सकता है और चोर जमीन पर ‘लव लेटर’ लिखकर पुलिस को ठेंगा दिखा सकते हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
सरगुजा में लगातार बढ़ते गंभीर अपराध और सुस्त पुलिसिंग यह साफ बयां करती है कि अम्बिकापुर अब अपराधियों की सुरक्षित शरणस्थली बनता जा रहा है, और यदि वक्त रहते इस नाकाम पुलिसिंग को दुरुस्त नहीं किया गया, तो साय सरकार के राज में सरगुजा पूरी तरह अराजकता की आग में झुलस जाएगा।
