अम्बिकापुर। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर में साइबर ठगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे आम लोगों के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं। ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सरगुजा जिले से सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने खुद सरगुजा एसएसपी राजेश अग्रवाल का फर्जी फेसबुक अकाउंट बना डाला। सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहने वाले एसएसपी के असली अकाउंट पर करीब साढ़े चार हजार फॉलोअर्स हैं, इसी लोकप्रियता का फायदा उठाने के लिए ठगों ने उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर यह जाल बुना है। शातिर ठग इस फेक आईडी से लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहे हैं और जैसे ही कोई इसे स्वीकार करता है, उससे बातचीत आगे बढ़ाकर मोबाइल नंबर की मांग की जा रही है।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब कुछ प्रबुद्ध नागरिकों को बातचीत के तौर-तरीकों पर शक हुआ और उन्होंने सीधे एसएसपी राजेश अग्रवाल को इसकी जानकारी दी। एसएसपी ने जब मामले की पड़ताल की, तो पता चला कि उनके नाम पर एक समानांतर फर्जी प्रोफाइल चलाई जा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस फेक आईडी में एसएसपी की आधिकारिक तस्वीरें लगाई गई हैं। प्रोफाइल पिक्चर में जहां एसएसपी की खुद की फोटो है, वहीं कवर फोटो में वे एडिशनल एसपी अमोलक सिंह ढिल्लो और सीएसपी राहुल बंसल के साथ अपने दफ्तर में बैठक लेते नजर आ रहे हैं। ठगों की इस चालबाजी के कारण अब तक करीब 72 लोग अनजाने में इस फर्जी अकाउंट के दोस्त (फ्रेंड्स) भी बन चुके हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी की शिकायत पर साइबर सेल ने तत्काल जांच शुरू कर दी है और तकनीकी इनपुट्स के आधार पर ठगों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है। इस बीच, एसएसपी राजेश अग्रवाल ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर पूरी तरह सतर्क रहें और ऐसे किसी भी संदिग्ध अकाउंट के झांसे में आकर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। गौरतलब है कि सरगुजा संभाग में वीआईपी (VIP) प्रोफाइल का दुरुपयोग कर ठगी की कोशिश का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी साइबर अपराधियों द्वारा सरगुजा और बलरामपुर के जिला कलेक्टरों के फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाए जा चुके हैं, जिनकी जांच में पता चला था कि उन विदेशी नंबरों का संचालन सरहद पार से किया जा रहा था। पुलिस अब इस नए मामले के पीछे के मास्टरमाइंड की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
