अम्बिकापुर..(सीतापुर/अनिल उपाध्याय)..सरगुजा जिले की सीतापुर नगर पंचायत में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर बड़ा खेल होने का मामला सामने आया है। नगरवासियों को कीटाणुरहित पानी देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘क्लोरीन डोजर बॉक्स’ योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कथित घोटाले के विरुद्ध किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि सत्तापक्ष के ही भाजपा पार्षद ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों रुपये के फर्जी आहरण का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
नगर पंचायत सीतापुर द्वारा करीब 46 लाख रुपये की लागत से शहर की सभी 12 बोर मशीनों में क्लोरीन डोजर बॉक्स लगाए जाने थे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पानी को कीटाणुरहित, गंधहीन और खनिज युक्त बनाकर घरेलू नल कनेक्शनों के माध्यम से जनता तक पहुंचाना था। योजना की शुरुआत में ही परिषद की बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने आशंका जताई थी, लेकिन जनहित को देखते हुए इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। आरोप है कि निविदा मिलने के बाद ठेकेदार ने अधिकारियों के साथ सांठगांठ की और केवल कुछ चुनिंदा जगहों पर ही डोजर बॉक्स लगाकर पूरे 46 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया।
वार्ड क्रमांक-2 के पार्षद भवानी सिंह ने इस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शहर में कुल 12 बोर मशीनें हैं, जिनसे पानी की आपूर्ति होती है। ठेकेदार ने गिनती की मशीनों में काम किया और बाकी को छोड़ दिया, लेकिन कागजों में काम को पूर्ण दर्शाकर भुगतान भी करा लिया गया। पार्षद ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले ही भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी और अब परिणाम सबके सामने है। इस कथित लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में नलों से बदबूदार और दूषित पानी आ रहा है, जिससे लोग जलजनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर सभी मशीनों में क्लोरीन डोजर सुचारू रूप से लगे होते, तो दूषित पानी की समस्या पैदा नहीं होती।
यह मामला राजनीतिक रूप से भी गरमाता जा रहा है क्योंकि क्षेत्र के विधायक और पूर्व सैनिक रामकुमार टोप्पो लगातार भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करते रहे हैं। विधायक ने सार्वजनिक मंचों से स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब जनता की नजरें विधायक के रुख पर टिकी हैं कि वे अपनी ही पार्टी के पार्षद द्वारा उठाए गए इस गंभीर मुद्दे पर क्या कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं। दूसरी ओर, नगर पंचायत के सीएमओ ओमप्रकाश शर्मा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि बोर मशीनों में जितने डोजर बॉक्स लगाए जाने थे, वे मानक अनुरूप लगाए जा चुके हैं और आरोप बेबुनियाद हैं। बहरहाल, पार्षद और जनता की मांग के बीच अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं।
