रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है। सरगुजा जिले के मैनपाट अंतर्गत राजापुर उपतहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट तुषार मानिक के साथ हुई मारपीट और अभद्रता के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने आज, 1 जून से प्रदेशव्यापी सामूहिक अवकाश, कामबंद और कलमबंद आंदोलन का ऐलान कर दिया है। अधिकारियों के इस कड़े रुख के बाद राज्य भर में राजस्व और न्यायिक कामकाज पूरी तरह ठप होने की आशंका गहरा गई है।
इस विवाद की जड़ें बीते 27 मई को हुई एक हिंसक घटना से जुड़ी हैं। सूचना के मुताबिक, सीतापुर से विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन एक फाइल पर हस्ताक्षर कराने राजापुर उपतहसील कार्यालय पहुंची थीं। इसी दौरान नायब तहसीलदार द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद वहां बहस शुरू हो गई, जिसके बाद उन्हें कार्यालय से बाहर जाने को कहा गया। यह कहासुनी कुछ ही देर में इतनी उग्र हो गई कि विधायक रामकुमार टोप्पो समेत उनके समर्थकों ने नायब तहसीलदार की बेरहमी से पिटाई कर दी और उनके कपड़े तक फाड़ डाले। घटना के बाद पीड़ित अधिकारी ने अम्बिकापुर कोतवाली थाने पहुंचकर मामला दर्ज कराया, जिसने प्रशासनिक हलकों में आक्रोश की चिंगारी भड़का दी।
कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ का कहना है कि यह हमला सिर्फ एक अधिकारी पर नहीं, बल्कि समूची न्यायिक व्यवस्था और प्रशासनिक गरिमा पर सीधा आघात है। इस घटना के विरोध में संघ ने 29 मई को भी सांकेतिक रूप से सामूहिक अवकाश लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था और प्रशासन को कार्रवाई के लिए अल्टीमेटम दिया था। अधिकारियों का तर्क है कि इस तरह के मामलों में त्वरित कार्रवाई न होना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, जिससे निष्पक्ष काम करने वाले कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा और कार्यस्थलों पर भय का माहौल बनेगा।
अब इस आंदोलन को राज्य के अन्य कर्मचारी संगठनों का भी पुरजोर समर्थन मिल रहा है। छात्रावास अधीक्षक संघ और राजस्व पटवारी संघ ने भी इस बर्बर घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक प्रदेश के सभी तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कार्यपालक मजिस्ट्रेट अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। बहरहाल, इस जमीनी विवाद ने अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप अख्तियार कर लिया है, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।
