80 वर्ष की उम्र में हुआ बाहुबली “नवरत्न” का निधन..जंगल में किया गया अंतिम संस्कार..!

सूरजपुर बिट्टू सिंह राजपूत- वन परिक्षेत्र प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम फुंसी में जंगल के अंदर में अज्ञात कारण से मरे नर हाथी को जंगल में गए कुछ ग्रामीणों ने देखा, जिसकी खबर आज सुबह से आग की तरह फैल गई, बताया जा रहा है कि यह तेज तरार स्वभाव का नवरत्न हाथी था, जो कि प्रतापपुर में भी दो बार आकर शहर में अपना आतंक फैला चुका था
वन परिक्षेत्र के अंतर्गत प्रतापपुर से लगे जंगल में इस नर हाथी का शव जंगल के रास्ते पहाड़ के ऊपर लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर पड़ा था, ग्रामीणों ने देखा तथा इसकी सूचना तत्काल प्रतापपुर वन परिक्षेत्र को दी गई जिसकी खबर वन विभाग को लगते ही 1 कर्मचारी व पशु चिकित्सा अधिकारियों की टीम किसी तरह जंगल के अंदर प्रवेश किए व उक्त हाथी के शव की विवेचना कर पोस्टमार्टम कर शव को वही पर जला कर उसका अंतिम संस्कार किया गया..
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ विजय सिंह ने बताया कि उक्त हाथी की उम्र 80 वर्ष के लगभग थी..  यह भैरा हाथी के नाम से क्षेत्र में अपना दहशत बनाया हुआ था पशु चिकित्सक डॉक्टर विजय सिंह ने यह भी बताया कि उक्त हाथी की उम्र शायद पूरी हो जाने के कारण इसकी मौत हुई है, तथा हाथी काफी विशाल काय था और करीब 15 दिन पूर्व ही इसकी मौत जंगल में हो गई थी लेकिन उसका शव जंगल में ही पड़ा रहा जिसकी सूचना पर डॉक्टरों की टीम व वन विभाग की टीम सहित ग्रामीण जंगल पहुंचे तथा काफी दुर्गम रास्ते से जंगल के अंदर प्रवेश करने में करीब 4 घंटा से ऊपर समय पहाड़ के रास्ते तय कर हाथी के शव तक पहुचा ।
वही ग्रामीणों की मानें तो उक्त हाथी को शायद किसी ने जहरीले तीर सेवार कर मार गिराया हो क्योंकि लंबे समय से इस क्षेत्र में विचरण कर रहे इस हाथी को कुछ दिन पूर्व लोगों ने जीवित वह स्वस्थ अवस्था में देखा था तो अचानक इस घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई
कर्मचारी व डॉक्टरों ने बताया कि काफी दुर्गम रास्ता होने के कारण उक्त स्थान पर JCB नहीं पहुंच पाई जिसके वजह से हाथी को दफन करने के लिए गड्ढा कराया जा सके इस कारण से वन विभाग के द्वारा हाथी को पोस्टमार्टम कर हाथी का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि गड्ढा खोदने को जब JCB मशीन नहीं पहुंच सकती थी तो मजदूरों से भी गढढा  कर शव को दफनाया जा सकता था जो वन विभाग ने नहीं किया व इस मामले से जुड़े समस्त तथ्य ही आग में जलकर नष्ट हो गए, क्योंकि लगातार मानव व हाथी के बीच हो रहे आपसी संघर्ष से पूरे ग्रामीण भयभीत थे