सरगुजा विश्वविद्यालय के वेतनभोगी वेतन के लिए लामबंद

अम्बिकापुर 
सरगुजा विश्वविद्यालय की स्थापना को सात साल पूरे हो गए,, लेकिन अपनी खराब प्रशासनिक व्यवस्था के कारण विश्वविद्यालय चर्चा का केन्द्र बना रहता है,, इस बार मसला यंहा काम कर रहे वेतनभोगी कर्मचारियो की वेतन से जुडा है,, जिसको लेकर विश्वविद्यालय के वेतनभोगी कर्मचारी अचनाक धरना में बैठ गए,, लेकिन दूसरी ओर प्रबंधन समस्या के हल ढूढने के बजाय आंदोलनरत कर्मचारियो को चेतावनी देता नजर आ रहा है….
किसी भी जिले मे काम करने वाला कोई भी कर्मचारी या मजदूर शासन या कलेक्टर द्वारा निर्धारित वेतन में काम करता है,, लेकिन शायद सरगुजा विश्वविद्यालय के लिए कोई भी नियम कायदा मायने नही रखता है,, तभी तो आज कलेक्टर दर पर वेतन देने की मांग को लेकर कर्मचारियो का गुस्सा ,,विश्वविद्यालय प्रबंधन पर फूट पडा,, और वेतनभोगी कर्मचारी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने धरने पर बैठ गए…
सरगुजा वि·ाविद्यालय के इन आंदोलनकारी वेतनभोगी कर्चारियो की माने तो मसला गंभीर ही नही बल्कि अपराधिक भी है,, क्योकि अपनी खराब प्रशासनिक व्यवस्थ के दौर से गुजर रहा ,, सात साल पुराना सरगुजा विश्वविद्यालय में कार्यकर्त इन वेतनभोगी को उतना भी वेतन नही दिया जा रहा है,, जितना कलेक्टर ने निर्धारित किया है,, लेकिन दूसरी ओर अपने हक की लडाई लड रहे इन कर्मियो के प्रति साहनभूति तो दूर,, वि·ाविद्यालय प्रबंधन इन पर कार्यवाही के मूड में नजर आ रहा है….
किसी भी वेतनभोगी को कलेक्टर दर पर वेतन की मांग और ओवरटाईम के बदले अतिरिक्त वेतन की मांग करना शायद किसी भी तरह से नाजायज नही है,, हां ये बात अलग है कि बहुत बर्दास्त करने के बाद प्रबंधन के खिलाफ कमरे के बाहर प्रदर्शन का ये तरीका भी सही नही है,,बहरहाल अब देखना है कि स्थापना काल से वि·ाविद्यालय के विभिन्न विभाग की बागडोर संभालने वाले इन वेतनभोगी कर्मचारियो को इनका वास्तविक वेतन मिलता है,, या फिर इनकी इस गुस्ताखी की सजा………