नई दिल्ली। राजनीतिक गलियारों से आ रही बड़ी खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट में जल्द ही एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। हालांकि इस बदलाव की आधिकारिक तारीख या मंत्रियों के नामों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन कयासों का बाजार गर्म है कि कई कद्दावर मंत्रियों की जिम्मेदारी बदली जा सकती है या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग-अलग हुई मुलाकातों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
इस संभावित फेरबदल में सबसे बड़ा नाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का सामने आ रहा है, जो पिछले कुछ समय से पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष के तीखे हमलों और देशव्यापी प्रदर्शनों का सामना कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि उन पर गाज गिरनी तय है। उनके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के विभागों में भी बदलाव की प्रबल संभावना है। वहीं, सिख या पंजाब के प्रतिनिधित्व को संतुलित करने के लिए हरदीप सिंह पुरी की जगह किसी अन्य चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
इस फेरबदल के जरिए सरकार न केवल अपने मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा कर रही है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश में है। चर्चा है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर आए सुखेंदु शेखर रे को इस बार मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इसके साथ ही महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे को कोई बड़ा पद दिया जा सकता है। आम आदमी पार्टी (AAP) से पाला बदलकर भाजपा में शामिल होने वाले राघव चड्ढा को लेकर भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलें तेज हैं, हालांकि चड्ढा ने इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस बीच, केरल के वरिष्ठ भाजपा नेता जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। वे अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन जैसे मंत्रालयों में राज्य मंत्री थे। दिलचस्प बात यह है कि रवनीत सिंह बिट्टू राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी पद पर बने हुए हैं, जबकि पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बावजूद वे केंद्र में मंत्री बने हुए हैं।
केंद्रीय स्तर पर मची इस हलचल के बीच भाजपा ने राज्यों में भी अपने संगठन को धार देना शुरू कर दिया है, जिसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से हो चुकी है। ‘मिशन-2027’ को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की टीम का विस्तार किया गया है, जिसमें उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री के कुल छह नए पद जोड़े गए हैं। इस नई टीम की सबसे खास बात यह है कि इसमें 60 फीसदी नए चेहरों को शामिल किया गया है, जबकि दो दर्जन से अधिक पुराने चेहरों की छुट्टी कर दी गई है।
यूपी की इस नई टीम में सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ-साथ महिलाओं (आधी आबादी) की भागीदारी बढ़ाई गई है, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ओबीसी (OBC) वर्ग को मिली है। उत्तर प्रदेश के इस बड़े संगठनात्मक बदलाव के बाद अब माना जा रहा है कि देश के अन्य राज्यों में भी जल्द ही इसी तरह के बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं, जो आगामी चुनावों के मद्देनजर भाजपा की नई रणनीति का हिस्सा हैं।
