जांजगीर-चांपा। जिले में खरीफ सीजन के बीच खाद संकट ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आमने-सामने ला खड़ा किया है। एक ओर कृषि विभाग की टीमें रोज़ाना छापेमारी कर सैकड़ों दुकानों से अवैध खाद जब्त करने का दावा कर रही हैं, तो दूसरी ओर जांजगीर चांपा विधायक व्यास कश्यप ने अधिकारियों पर सीधा हमला बोला है। विधायक का आरोप है कि सरकारी सोसायटियों में जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जबकि निजी दुकानों में भरपूर स्टॉक दिख रहा है—यही असंतुलन कालाबाजारी की जड़ है।
विधायक के मुताबिक किसान सरकारी दर पर खाद पाने के लिए भटक रहे हैं और मजबूरी में निजी व्यापारियों से महंगे दाम चुकाने को विवश हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जिले में वाकई पर्याप्त स्टॉक है, तो फिर सरकारी सोसायटियों के गोदाम खाली क्यों? वहीं, कृषि विभाग की लगातार जब्ती ने खुद प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं—जब सैकड़ों बोरी अवैध खाद पकड़ी जा रही है, तो कालाबाजारी किसकी नाक के नीचे फल-फूल रही है?
इधर छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक जितेंद्र कुमार शुक्ला ने जांजगीर कलेक्ट्रेट पहुंच कर बैठक लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया। मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि जिले में खाद की कमी नहीं है और शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन ज़मीनी हकीकत प्रशासनिक बयानों से मेल नहीं खा रही।
कुल मिलाकर जांजगीर-चांपा में खाद संकट अब आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति बन चुका है। सवाल साफ है क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावा है, या व्यवस्था की नाकामी पर पर्दा? जवाब तब मिलेगा, जब किसान को समय पर, सही दाम पर खाद मिलेगी।
